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वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma

महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished248 पृष्ठ

पृष्ठ 184, कुल 248 में से

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पृष्ठ 184

१५८ वात्स्यायन-कामसूत्र
वेश्या को सहसा नहीं मिलना चाहिये, क्योंकि पुरुषों की यह प्रवृत्ति होती है कि वे सुलभ वस्तु
का अपमान कर, दुर्लभ की आकांक्षा करते हैं ॥ २१ ॥
भावजिज्ञासार्थं परिचारकमुखान् संवाहकगायनवैहासिकान् गम्ये तद्भाक्तान्
वा प्रणिदध्यात् ॥ २२ ॥
भावजिज्ञासा—नायक के भावों को जानने के लिये प्रमुख नौकर, संवाहक (हाथ-पैर
दबाने वाला), गायक और विदूषक को या दूसरे जो भी उसके भक्त हों, उन्हें नियुक्त
करें ॥ २२ ॥
तदभावे पीठमर्दादीन्। तेभ्यो नायकस्य शौचाशौचं रागापरागौ सक्तासक्ततां
दानादाने च विद्यात् ॥ २३ ॥
इनके अभाव में पीठमर्द१ आदि को नियुक्त करें। इनके माध्यम से ही नायक का अपने
प्रति जो शौच-अशौच, राग-अपराग, सक्तता-असक्तता, दान-अदान का भाव हो, उन सबको
जान लें ॥ २३ ॥
सम्भावितेन च सह विटपुरोगां प्रीतिं योजयेत् ॥ २४ ॥
जिसमें अपनी इच्छा की सभी बातों की सम्भावना हो उसके पीछे प्रेमपूर्वक विट
लगा दें ॥ २४ ॥
लावककुक्कुटमेषयुद्धशुकशारिकाप्रलापनप्रेक्षणककलाव्यपदेशेन पीठ-
मर्दो नायकं तस्या उदवसितमानयेत् ॥ २५ ॥
प्रेमसूत्र जोड़ने के उपाय—पीठमर्द को चाहिये कि लवा, मुर्गा और भेड़ा की लड़ाई,
शुक-सारिका आदि की बातें, नाटक-तमाशा आदि दिखाने, गीत-संगीत आदि का कलाकौशल
दिखाने के व्याज से नायक को वेश्या के घर ले जाये ॥ २५ ॥
तां वा तस्य ॥ २६ ॥
उस वेश्या को ही उस नायक के घर ले जाये ॥ २६ ॥
आगतस्य प्रीतिकौतुकजननं किञ्चिद् द्रव्यजातं स्वयमिदमसाधारणोपभोग्य-
मिति प्रीतिदायं दद्यात् ॥ २७ ॥
आगत का स्वागत—जब नायक वेश्या के घर आ जाये, तो वेश्या उसे प्रेमोपहार स्वरूप
ऐसी बहुमूल्य एवं असाधारण वस्तु स्वयं भेंट करे जो प्रीति एवं विस्मय उत्पन्न करने
वाली हो ॥ २७ ॥
यत्र च रमते तया गोष्ठ्यैनमुपचारैश्च रञ्जयेत् ॥ २८ ॥
गोष्ठी में सम्मान—और जहाँ नायक का मन रमता हो, उसी गोष्ठी में उपयुक्त उपचारों से
वेश्या उसका मनोरंजन करे ॥ २८ ॥
गते च सपरिहासप्रलापां सोपायनां परिचारिकामभीक्ष्णं प्रेषयेत् ॥ २९ ॥
प्रेम की दृढ़ता हेतु उपाय—नायक के घर चले जाने पर वेश्या मुस्कानपूर्वक मधुर वचन
बोलने वाली परिचारिका द्वारा प्रेमोपहार बार बार भिजवाये ॥ २९ ॥
१. पीठमर्द, विदूषक और विट—ये सब नायक के दूत होते हैं।