वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)
Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma
महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१५६ वात्स्यायन-कामसूत्र
करती है-जो पारिवारिक बन्धनों से पूर्णतः मुक्त हो, जो तरुण हो, धनवान् हो और तत्काल
खर्च कर सके, जिसके पास अत्यधिक पैतृक सम्पदा हो, जो स्वयं न कमाकर दूसरों की कमाई
खर्च करता हो, जो अन्य वेश्यागामियों से प्रतिद्वन्द्विता रखता हो, जो अपने रूप, सौन्दर्य और
सम्पत्ति का अभिमान रखता हो, जो नपुंसक होकर भी अपने को समर्थ पुरुष समझता हो, जो
दानशील हो, जो राजा या उसके राजपुरुषों पर अपना प्रभाव रखता हो, जो प्रख्यात ज्योतिषी,
चरित्रहीन, माता पिता का इकलौता बेटा, प्रच्छन्नकाम संन्यासी, शूरवीर और वैद्य हो ॥ १० ॥
प्रीतियशोऽर्थास्तु गुणतोऽधिगम्याः ॥ ११ ॥
गुण के कारण मिलने योग्य पुरुष-जो वेश्याएँ विशुद्ध प्रीति और यश की इच्छा
रखती हैं, वे गुणी पुरुषों से संसर्ग करती हैं ॥ ११ ॥
महाकुलीनो विद्वान् सर्वसमयज्ञः कविराख्यानकुशलो वाग्मी प्रगल्भो
विविधशिल्पज्ञो वृद्धदर्शी स्थूललक्षो महोत्साहो दृढभक्तिरनसूयकस्त्यागी मित्र-
वत्सलो घटागोष्ठीप्रेक्षणकसमाजसमस्याक्रीडनशीलो नीरुजोऽव्यङ्गशरीरः प्राण-
वानमद्यपो वृषो मैत्रः स्त्रीणां प्रणेता लालयिता च । न चासां वशगः स्वतन्त्रवृत्तिर-
निष्ठुरोऽनीर्ष्यालुरनवशङ्की चेति नायकगुणाः ॥ १२ ॥
नायकोचित गुण-प्रतिष्ठित कुल, प्रख्यात विद्वान्, सभी प्रकार के संकेतों का ज्ञाता,
कवि या कथाकार, बोलने में निपुण, चतुर, विविध शिल्पों का ज्ञानी, विनम्र, महाशय,
उत्साहसम्पन्न, दृढ़भक्त, अनिन्दक, त्यागशील, मित्रवत्सल, घटा-गोष्ठी-नाटक-समाज-
उत्तसव-समस्याक्रीड़ा आदि में रुचि रखने वाला, नीरोग एवं स्वस्थ शरीर, शक्तिशाली,
मदिरापान से दूर, प्रचण्ड कामशक्ति वाला, दयासम्पन्न, स्त्रियों के सदाचार का समर्थक और
रक्षक, स्त्रियों के वशीभूत न होने वाला, स्वतन्त्रवृत्ति वाला, सहृदय एवं ईर्ष्यारहित और निःशंक
स्वभाव वाला-ये नायक के गुण हैं ॥ १२ ॥
नायिका पुना रूपयौवनलक्षणमाधुर्ययोगिनी गुणेष्वनुरक्ता न तथार्थेषु प्रीति-
संयोगशीला स्थिरमतिरेकजातीया विशेषार्थिनी नित्यमकदर्यवृत्तिर्गोष्ठीकलाप्रिया
चेति नायिकागुणाः ॥ १३ ॥
नायिका के गुण-यह सुन्दरी, लावण्यसम्पन्न, रूप और यौवन से युक्त, सौभाग्यसूचक
चिह्नों वाली, माधुर्यसम्पन्न, नायक के गुणों में अनुरक्त, किन्तु उसके धन में आसक्ति न रखने
वाली, प्रेमपूर्वक सम्भोग चाहने वाली, स्थिर बुद्धि वाली, माया-मोह में न पड़ने वाली, नायक
की विशेषताओं पर रीझने वाली, पवित्रतापूर्वक जीवनयापन करने वाली तथा गोष्ठी एवं कलाओं
से प्रेम करने वाली हो ॥ १३ ॥
नायक-नायिकयो पुनर्बुद्धिशीलाचार आर्जवं कृतज्ञता दीर्घदूरदर्शित्वं अवि-
संवादिता देशकालज्ञता नागरकता दैन्यातिहासपैशुन्यपरिवादक्रोधलोभस्तम्भ-
चापलवर्जनं पूर्वाभिभाषिता कामसूत्रकौशलं तदङ्गविद्यासु चेति साधारण-
गुणाः ॥ १४ ॥
दोनों के सामान्य गुण-बुद्धि, शील, आचार, निश्छलता, कृतज्ञता, दूरदर्शिता, वाद-