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सर्वकोश
वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma

महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished248 पृष्ठ

पृष्ठ 178, कुल 248 में से

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पृष्ठ 178

१५२ वात्स्यायन-कामसूत्र
एक लक्ष्य बनाकर शेष स्त्रियों को भी अपनी ओर तोड़ लें। एक दूसरे को दूषित कर जब सबके
ही चरित्र एक से हो जायें, तो कोई किसी का रहस्योद्घाटन नहीं करती और सभी अभीष्ट फल
प्राप्त करती हैं ॥ २८ ॥
तत्र राजकुलचारिण्य एव लक्षण्यान् पुरुषानन्तःपुरं प्रवेशयन्ति, नातिसुरक्ष-
त्वादापरान्तिकानाम् ॥ २९ ॥
रानियों के भोगविलास : अपरान्त देश की प्रवृत्ति—अपरान्त देश में राजकुलों में
आने वाली स्त्रियाँ ही सुन्दर और चण्डवेग पुरुषों को अन्तःपुर में प्रविष्ट करा देती हैं; क्योंकि
वहाँ के अन्तःपुर अत्यधिक सुरक्षित नहीं होते ॥ २९ ॥
क्षत्रियसंज्ञकैरन्तःपुररक्षिभिरेवार्थं साधयन्त्याभीरकाणाम् ॥ ३० ॥
आभीर की प्रवृत्ति—आभीर राजा के अन्तःपुर में रानियाँ वहाँ के क्षत्रिय-रक्षकों को ही
फँसाकर अपना प्रयोजन सिद्ध कर लेती हैं ॥ ३० ॥
प्रेष्याभिः सह तद्वेषान्नागरकपुत्रान् प्रवेशयन्ति वात्सगुल्मकानाम् ॥ ३१ ॥
वत्सगुल्म की प्रवृत्ति—वत्सगुल्म देश के राजकुल में दासियों के साथ दासीवेश में रानी
तरुण नागरकों को प्रवेश करा लेती हैं ॥ ३१ ॥
स्वैरेव पुत्रैरन्तःपुराणि कामचारैर्जननीवर्जमुपयुज्यन्ते वैदर्भकाणाम् ॥ ३२ ॥
विदर्भ की प्रवृत्ति—विदर्भ के राजवंश में तो अपने औरस पुत्रों की छोड़कर रानियाँ
सभी राजकुमारों से सम्भोग करा लेती हैं ॥ ३२ ॥
तथा प्रवेशिभिरेव ज्ञातिसम्बन्धिभिर्नान्यैरुपयुज्यन्ते स्त्रैराजकानाम् ॥ ३३ ॥
स्त्रीराज्य की प्रवृत्ति—स्त्रीराज्य की रानियाँ केवल सजातीय सम्बन्धियों से ही
सम्भोगकर्म कराती हैं, अन्यों से नहीं ॥ ३३ ॥
ब्राह्मणेर्मित्रैर्भृत्यैर्दासचेटैश्च गौडानाम् ॥ ३४ ॥
गौड़ देश की प्रवृत्ति—गौड़ देश की रानियाँ ब्राह्मण, मित्र, भृत्य, दास और चेटों से भी
सम्भोग कर लेती हैं ॥ ३४ ॥
परिस्पन्दाः कर्मकराश्चान्तःपुरेष्वनिषिद्धा अन्येऽपि तद्रूपाश्च सैन्धवानाम् ॥ ३५ ॥
सिन्ध देश की प्रवृत्ति—सिन्ध देश में जिन नौकरों और नागरिकों का राजभवन में
प्रवेश निषिद्ध नहीं है, उन सबके साथ रानियाँ सम्भोग कर लेती हैं ॥ ३५ ॥
अर्थेन रक्षिणमुपगृह्य साहसिकाः संहताः प्रविशन्ति हैमवतानाम् ॥ ३६ ॥
हैमवतों की प्रवृत्ति—हैमवतों में साहसी एवं तरुण व्यक्ति सुरक्षाकर्मियों को धन से
अनुकूल बनाकर, एकत्र होकर, राजभवन में प्रवेश कर जाते हैं ॥ ३६ ॥
पुष्पदाननियोगात्नगरब्राह्मणा राजविदितमन्तःपुराणि गच्छन्ति। पटान्तरित-
श्चैषामालापः। तेन प्रसङ्गेन व्यतिकरो भवति वङ्गाङ्गकलिङ्गकानाम् ॥ ३७ ॥
अंग-वंग और कलिङ्ग—अंग, वंग और कलिङ्ग देशों में नगर के ब्राह्मण पूजा के फूल
देने राजभवनों में आते हैं। रानियाँ उनसे परदे के पीछे से बातें करती हैं और इसी प्रसंग में अवैध
सम्बन्ध भी हो जाते हैं ॥ ३७ ॥