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वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma

महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished248 पृष्ठ

पृष्ठ 175, कुल 248 में से

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पृष्ठ 175

५. पारदारिक अधिकरण १४९
स्त्रीयोगेनेव पुरुषाणामप्यलब्धवृत्तीनां वियोनिषु विजातिषु स्त्रीप्रतिमासु
केवलोपमर्दनाच्चाभिप्रायनिवृत्तिर्व्याख्याता ॥ ५॥
पुरुष भी स्त्री न मिलने पर अपने भाव की निवृत्ति योनिरहित क्रियाओं में, भेड़ बकरी
आदि विजातियों में, स्त्रियों की प्रतिमाओं में और केवल उपमर्दन से करें ॥ ५ ॥
योषावेषांश्च नागरकान् प्रायेणान्तःपुरिकाः परिचारिकाभिः सह प्रवेश-
यन्ति ॥ ६॥
नागरकों का प्रवेश—अन्तःपुर में रहने वाली रानियाँ दासियाँ के साथ प्रायः नागरकों
को स्त्रीवेश में प्रवेश करा लेती हैं ॥ ६ ॥
तेषामुपावर्तने धात्रेयिकाश्चाभ्यन्तरसंसृष्टा आयतिं दर्शयन्त्यः प्रयतेरन् ॥ ७ ॥
उन नागरकों को तैयार करने के लिये रानियों की अन्तरंग धाय की पुत्रियों को चाहिये कि
वे नागरकों को अन्तःपुर-प्रवेश के लाभों को समझायें ॥ ७ ॥
सुखप्रवेशितामपसारभूमिं विशालतां वेश्मनः प्रमादं रक्षिणामनित्यतां
परिजनस्य वर्णयेयुः ॥ ८॥
वे नागरकों को तैयार करते समय अन्तःपुर में सरल प्रवेश और निकलने के सुगम मार्ग,
अन्तःपुर की विशालता, सुरक्षाकर्मियों के प्रमाद तथा राजा एवं राजकुमारों के सदैव न रहने को
बतायें ॥ ८ ॥
न चासद्भूतेनार्थेन प्रवेशयितुं जनमावर्तयेयुर्दोषात् ॥ ९ ॥
प्रबन्ध के अभाव में प्रवेश न करे—यदि आने-जाने का सुगम और निरापद मार्ग न हो
तो अन्तःपुर में किसी को प्रवेश नहीं कराना चाहिये, क्योंकि इससे हानि की आशंका है ॥ ९ ॥
नागरकस्तु सुप्रापमप्यन्तःपुरमपायभूयिष्ठत्वान्न प्रविशेदिति वात्स्या-
यनः ॥ १० ॥
अन्तःपुर में प्रवेश के विषय में महर्षि वात्स्यायन कहते हैं—अन्तःपुर में प्रवेश का मार्ग
कितना भी सुगम क्यों न हो, किन्तु नागरक को उसमें कदापि प्रवेश नहीं करना चाहिये; क्योंकि
इसमें महान् हानि की सम्भावना है ॥ १० ॥
सापसारं तु प्रमदवनावगाढं विभक्तदीर्घकक्ष्यमल्पप्रमत्तरक्षकं प्रोषितराजकं
कारणानि समीक्ष्य बहुश आहूयमानोऽर्थबुद्ध्या कक्ष्याप्रवेशं च दृष्ट्वा ताभिरेव
विहितोपायः प्रविशेत् ॥ ११ ॥
विशेष बातें—नागरक अन्तःपुर में प्रवेश करने का विचार तभी बनाये जब निकलने का
मार्ग हो, अन्तःपुर से लगा हुआ सघन प्रमदवन हो, रानियों के अलग अलग और बड़े-बड़े कक्ष
हों, सुरक्षाकर्मी कम और असावधान हों, राजा बाहर गये हुए हों, सम्भोग हेतु रानी कई बार
बुला चुकी हो, अर्थ की प्राप्ति सुनिश्चित हो और बताने वाली से सारे उपाय जान लिये हों ॥ ११ ॥
शक्तिविषये च प्रतिदिनं निष्क्रामेत् ॥ १२ ॥
यदि अन्तःपुर में आवागमन की सुगम सुविधा हो तो वहाँ से प्रतिदिन ही निकल आना
चाहिये अर्थात् वहाँ ठहरना नहीं चाहिये ॥ १२ ॥