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वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma

महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished248 पृष्ठ

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पृष्ठ 135

४. भार्याधिकारिक अधिकरण १०९
आदि का अनुलेप (सुगन्धित क्रीम) लगाये, इत्रादि का प्रयोग करे और केशों में श्वेत पुष्पों की
माला लगाये ॥ २५ ॥
नायकस्य व्रतमुपवासं च स्वयमपि करणेनानुवर्तेत । वारितायां च नाहमत्र
निर्वन्धनीयेति तद्वचसो निवर्तनम् ॥ २६ ॥
व्रतोपवास — पति द्वारा किये जाने वाले व्रतोपवासों का स्वयं भी आचरण करे । यदि पति
मना करे, तो 'आप मुझसे ऐसा आग्रह न करें। मैं आपकी सहधर्मिणी हूँ, इसलिए मुझे भी आपके
व्रतोपवासों का पालन करना चाहिये' — ऐसा कहकर मना करने से रोक दे ॥ २६ ॥
मृद्विदलकाष्ठचर्मलोहभाण्डानां च काले समर्धग्रहणम् ॥ २७ ॥
समयानुसार क्रय — मिट्टी, बाँस, काष्ठ, चर्म और लोहे का उपयोगी सामान जब भी
सस्ता और अच्छा मिले खरीदकर रख ले ॥ २७ ॥
तथा लवणस्नेहयोश्च गन्धद्रव्यकटुकभाण्डौषधानां च दुर्लभानां भवनेषु
प्रच्छन्नं निधानम् ॥ २८ ॥
उपयोगी सामग्री का संग्रह — नमक, घी, तेल, सुगन्धित वस्तुएँ, कटुक, बर्तन, औषध
और दुर्लभ वस्तुओं को भवन में ढँककर सुरक्षित रखे ॥ २८ ॥
मूलकालुकपालङ्की-दमनकाम्रातकैर्वारुकत्रपुसवार्ताककूष्माण्डालाबु -
सूरणशुकनासास्वयंगुप्तातिलपर्णिकाग्निमन्थलशुनपलाण्डुप्रभृतीनां सर्वौषधीनां च
बीजग्रहणं काले वापश्च ॥ २९ ॥
मूली, आलु (अरवी), पालक, दोना, आम्रा, ककड़ी, खीरा, बैंगन, काशीफल, लौकी,
जिमीकन्द, सोनापाठा, कौंच, खम्भारी, अरणी, लहसुन, प्याज और नानाविध औषधियों के
बीज सँभालकर रखे और उन्हें समय पर बोये ॥ २९ ॥
स्वस्य च सारस्य परेभ्यो नाख्यानं भर्तृमन्त्रितस्य च ॥ ३० ॥
गोपनीयता को अक्षुण्ण रखना — अपना धन और पति की गोपनीय बातों को किसी से
नहीं कहना चाहिये ॥ ३० ॥
समानाश्च स्त्रियः कौशलेनोज्ज्वलतया पाकेन मानेन तथोपचारैरति-
शयीत ॥ ३१ ॥
समानता वाली स्त्रियों का अतिक्रमण — समान अवस्था एवं प्रतिष्ठा वाली स्त्रियों का
कलाकौशल से, उज्ज्वलता से, पाककला से, मान-सम्मान से और उपचारों से अतिक्रमण कर
जाये ॥ ३१ ॥
सांवत्सरिकमायं सङ्ख्याय तदनुरूपं व्ययं कुर्यात् ॥ ३२ ॥
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