वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)
Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma
महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१०८ वात्स्यायन-कामसूत्र
पश्चात्संवेशनं पूर्वमुत्थानमनवबोधनं च सुप्तस्य ॥ १७ ॥
सोना और जागना—पत्नी को पति के सो जाने पर सोना चाहिये और उसके जागने से
पहले जागना और उठ जाना चाहिये ॥ १७ ॥
महानसं च सुगुप्तं स्याद्दर्शनीयं च ॥ १८ ॥
पाकशाला (रसोईघर)—पाकशाला स्वच्छ, प्रकाशपूर्ण तथा एक ओर होनी
चाहिये ॥ १८ ॥
नायकापचारेषु किञ्चित्कलुषिता नात्यर्थं निर्वदेत् ॥ १९ ॥
पति के अपराध करने पर भी अकलुषित रहना—पति के अपराध करने पर भी अल्प
अप्रसन्नता दिखाये और भविष्य में ऐसा न करने की रससिक्त चेतावनी दे ॥ १९ ॥
साधिक्षेपवचनं त्वेनं मित्रजनमध्यस्थमेकाकिनं वाप्युपालभेत। न च
मूलकारिका स्यात् ॥ २० ॥
जादू-टोनों से दूर—यदि पति को उपालम्भ देना आवश्यक ही हो, तो एकान्त या उसके
मित्रों के मध्य ही दे, किन्तु जादू-टोना या वशीकरण कदापि न करे ॥ २० ॥
नह्यतोऽन्यदप्रत्ययकसारणमस्तीति गोनर्दीयः ॥ २१ ॥
पति-पत्नी के मध्य अविश्वास उत्पन्न करने वाला इनके अतिरिक्त अन्य कोई कारण नहीं
है—ऐसा आचार्य गोनर्दीय का मत है ॥ २१ ॥
दुर्वाहतं दुर्निरीक्षितमन्यतो मन्त्रणं द्वारदेशावस्थानं निरीक्षणं वा निष्कुटेषु
मन्त्रणं विविक्तेषु चिरमवस्थानमिति वर्जयेत् ॥ २२ ॥
वर्जित कृत्य—दुर्वाक्य बोलना, आँखे तरेरकर देखना, विमुख होकर बातें करना, द्वार
पर खड़े रहना या वहाँ से आने जाने वालों को देखना, इधर उधर खड़े होकर परामर्श करना,
एकान्त में देर तक खड़े रहना—इन कुत्सित प्रवृत्तियों को छोड़ देना चाहिये ॥ २२ ॥
स्वेददन्तपङ्कदुर्गन्धांश्च बुद्ध्येतेति विरागकारणम् ॥ २३ ॥
शरीरसंस्कार और शृंगार—पसीने की गन्ध, मुख की दुर्गन्ध तथा अन्य शारीरिक
दुर्गन्धों को तत्काल दूर करना चाहिये, क्योंकि इनसे पति में विरक्ति आ सकती है ॥ २३ ॥
बहुभूषणं विविधकुसुमानुलेपनं विविधाङ्गरागसमुज्ज्वलं वास
इत्याभिगामिको वेषः ॥ २४ ॥
समागम का वेश—अनेक प्रकार के आभूषण, विविध प्रकार के सुगन्धित अनुलेप
(क्रीम), विविध प्रकार के अङ्गराग (पाउडर) लगाकर और उज्ज्वल वस्त्र पहनकर ही पति के
पास सम्भोगार्थ जाना चाहिये ॥ २४ ॥
प्रतनुलक्ष्णाल्पदुकूलता परिमितमाभरणं सुगन्धिता नात्युल्बणमनुलेपनम्।
तथा शुक्लान्यन्यानि पुष्पाणीति वैहारिको वेषः ॥ २५ ॥
गोष्ठीविहार का वेश—यदि गोष्ठीविहार के लिये जाना हो, तो नायिका शरीर पर हल्का,
पतला और चिकना परिधान पहने; केवल नाक, कान और गले में आभूषण धारण करे, चन्दन