वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)
Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma
महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें१०६ वात्स्यायन-कामसूत्र
४.
भार्याधिकारिक चतुर्थ अधिकरण
प्रथम अध्याय
एकचारिणीवृत्तप्रकरण
भार्यैकचारिणी गूढविश्रम्भा देववत् पतिमानुकूल्येन वर्तेत ॥ १ ॥
एकचारिणी भार्या (पत्नी) को पति को अतिविश्वासपात्र बनकर और पति को देवता
मानकर, उसकी चित्तवृत्ति के अनुरूप व्यवहार करना चाहिये ॥ १ ॥
तन्मतेन कुटुम्बचिन्तामात्मनि संनिवेशयेत् ॥ २ ॥
एकचारिणी भार्या के आचरण—पति की सहमति से कुटुम्ब की व्यवस्था का दायित्व
अपने ऊपर ले ले ॥ २ ॥
वेश्म च शुचि सुसम्मृष्टस्थानं विरचितविविधकुसुमं श्लक्ष्णभूमितलं हृद्यदर्शनं
त्रिशवणाचरितबलिकर्म पूजितदेवतायतनं कुर्यात् ॥ ३ ॥
घर की स्वच्छता और पूजाकार्य—झाड़-पोंछ और धोकर घर को निर्मल पवित्र रखे,
उपयुक्त स्थानों पर सुगन्धित पुष्प आदि उत्पन्न कर उन्हें सजाये, आँगन को स्वच्छ और रमणीय
बनाये, प्रातः, मध्याह्न और सायं काल—तीनों समय बलिकर्म करे तथा घर के मन्दिर या पूजागृह
में समय पर पूजा करे ॥ ३ ॥
न ह्यतोऽन्यद् गृहस्थानां चित्तग्राहकमस्तीति गोनर्दीयः ॥ ४ ॥
आचार्य गोनर्दीय का मत है कि सद्गृहस्थों का चित्त आकर्षित करने के लिये इससे
बढ़कर दूसरी अन्य कोई बात नहीं है ॥ ४ ॥
गुरुषु भृत्यवर्गेषु नायकभगिनीषु तत्पतिषु च यथार्हं प्रतिपत्तिः ॥ ५ ॥
गुरुजन का सम्मान—गुरुजन (सास-ससुर, आचार्य, ब्राह्मण आदि), नौकर-चाकर,
ननद और उसके पति के साथ यथायोग्य आचरण करे ॥ ५ ॥
परिपूतेषु च हरितशाकवप्रानिक्षुस्तम्बाञ्जीरकसर्षपाजमोदशतपुष्पातमाल-
गुल्माँश्च कारयेत् ॥ ६ ॥
गृहवाटिका की व्यवस्था—साफ-सुथरे स्थान पर दैनिक प्रयोग में आने वाली
शाकभाजी की क्यारियाँ बनाये, और ईख, जीरा, सरसों, अजमोद, सौंफ एवं तमाल के पौधे
लगाये ॥ ६ ॥
कुब्जकामलमल्लिकाजातीकुरण्टकनवमालिकातगरनन्द्यावर्तजपागुल्मान-
न्यांश्च बहुपुष्पान् बालकोशीरकपातालिकाँश्च वृक्षवाटिकायां च स्थण्डिलानि
मनोज्ञानि कारयेत् ॥ ७ ॥
गुलाबवास, मोतिया, चमेली, करण्टक (नेवारी), नवमल्लिका (वासन्ती), तगर,
कदम्ब, जपाकुसुम एवं अन्यान्य फूलों के गुल्म (गाछ या झाड़ियाँ) तथा नेत्रवाला, खस.