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वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

वात्स्यायन कामसूत्र (सान्वय सम्पूर्ण हिन्दी अनुवाद एवं सविस्तार व्याख्या - पं. रामानन्द शर्मा)

Vatsyayana Kamasutra with Complete Hindi Commentary by Ramanand Sharma

महर्षि वात्स्यायन (टीकाकार: पं. रामानन्द शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished248 पृष्ठ

पृष्ठ 129, कुल 248 में से

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पृष्ठ 129

३. कन्यासम्प्रयुक्तक अधिकरण १०३
त्वामजानतीमिव नायको बलाद् ग्रहीष्यतीति तथा सुपरिगृहीतं स्यादिति
योजयेत् ॥ ११ ॥
नायिका को बता दे कि नायक तुम्हें अपरिचित के समान हर ले जायेगा। इस प्रकार तुम
उसकी पत्नी भी बन जाओगी और तुम्हें कोई दोष भी नहीं देगा—यह अन्त में योजना
करे ॥ ११ ॥
प्रतिपन्नामभिप्रेतावकाशवर्तिनीं नायकः श्रोत्रियागारादग्निमानाय्य कुशाना-
स्तीर्य यथास्मृति हुत्वा च त्रिः परिक्रमेत् ॥ १२ ॥
विधिवत् विवाह आवश्यक—दूती द्वारा बहकायी गयी और नायक द्वारा हरण कर ली
गयी नायिका जब नायक के साथ निर्जन स्थान में पहुँच जाये, तो किसी अग्निहोत्री ब्राह्मण के
घर से अग्नि लाकर, स्मृतिशास्त्र (धर्मशास्त्र) के अनुसार हवन करके नायक और नायिका,
दोनों अग्नि की तीन परिक्रमा करे ॥ १२ ॥
ततो मातरि पितरि च प्रकाशयेत् ॥ १३ ॥
तत्पश्चात् पति और पत्नी, दोनों अपने अपने अभिभावकों को विवाह की सूचना दे
दें ॥ १३ ॥
अग्निसाक्षिका हि विवाहा न निवर्तन्त इत्याचार्यसमयः ॥ १४ ॥
अग्नि की साक्षी में किये गये विवाह अमान्य नहीं होते—ऐसा आचार्यों का संकेत
हैं ॥ १४ ॥
दूषयित्वा चैनां शनैः स्वजने प्रकाशयेत् ॥ १५ ॥
गुप्तरूप से दूषित कर विवाह—वाञ्छित कन्या को दूषित कर धीरे से उसके परिवार
वालों को बता देना चाहिये ॥ १५ ॥
तद्बान्धवाश्च यथा कुलस्याघं परिहरन्तो दण्डभयाच्च तस्मा एवैनां दद्युस्तथा
योजयेत् ॥ १६ ॥
नायिका के बान्धव, जिस प्रकार, कुल के कलंक को दूर करते हुए और राजदण्ड से
आतङ्कित होकर उसे नायक को दे दें, वैसी ही योजना करनी चाहिये ॥ १६ ॥
अनन्तरं च प्रीत्युपग्रहेण रागेण तद्बान्धवान् प्रीणयेदिति ॥ १७ ॥
इस प्रकार जब छलछद्म से कन्या नायक को पत्नीरूप में प्राप्त हो जाये, तो प्रेमपूर्ण
अनुरोधों, उपहारों और उपकारों से कन्या के बन्धु-बान्धवों को प्रसन्न कर ले ॥ १७ ॥
गान्धर्वेण विवाहेन वा चेष्टेत ॥ १८ ॥
अथवा गान्धर्व विवाह की ही चेष्टा करे और इस नीच कर्म में प्रवृत्त ही न हो ॥ १८ ॥
अप्रतिपद्यमानायामन्तश्चारिणीमन्यां कुलप्रमादं पूर्वसंसृष्टां प्रीयमाणां चोपगृह्य
तया सह विषह्यमवकाशमेनामन्यकार्यापदेशनानाययेत् ॥ १९ ॥
मध्यस्थों के माध्यम से गुप्त विवाह—जो नायिका स्वयं पाणिग्रहण कराने में असमर्थ
हो, तो दोनों (वर एवं कन्या) पक्षों से अन्तरङ्ग सम्बन्ध रखने वाली किसी कुलवधू को धन का