वासवदत्ता (महाकवि सुबन्धु - श्लेष-प्रधान शास्त्रीय गद्यकाव्य सान्वय सटीक)
Vasavadatta of Mahakavi Subandhu with Commentary
महाकवि सुबन्धु द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंणं¹) द्विजराजो ऽकरोत्। पुरूरवा ब्राह्मणधनतृष्णया विन-
नाश। नहुषश् (शक्र)कलत्र(दोहळी भुजंगताम् अयासीत्)। य-
यातिः (कृतपुरोहितसुता)पाणिग्रहणः [२७४] पपात। सुद्युम्नः
स्त्रीमय (एवा) ऽभवत्। सोमकस्य प्रख्याता (जगती²) जंतुव-
धनिर्घृणता। पुरुकुत्सः कुत्सित (एवा ऽभवत्)। कुवलयाश्वो
ऽश्व[२७५]तारकन्न्यामपि (जगाम)। नृगः कृकलासताम् अगमत्।
(नलः कलिना ऽभिभूतः।) संवरणो मित्रदुहितरि विक्लबताम्
(अगमत्)। [२७६] दशरथः (अभी)ष्टरामोन्मादेन मृत्युम् अवा-
प। कार्तवीर्यो [गो]ब्राह्मणपीडया पंचत्वम् अयासीत्। [युधि-
ष्ठिरः समरशिरसि सत्यम् उत्ससर्ज।] (शंतनुर्³) अतिव्यसनात्
(वने⁴) विललाप। (तद्) इत्थं ना ऽस्त्य् (एव जगत्य्) अकळंकः को
ऽपि। तद् अहम् अपि देहम् (उत्सृ(१०८)जामी) ऽत्य् (एवं) वि[२७७]चिं-
त्य कुरर[खर]नखरशिखरखंडित(पृथुळ⁵)पृथुरोम-
[बिलमविरलशकुलकुल]शल्क(संकुलं⁶ संकलित)जलनकुल(कु-
लो⁷)च्चार(शारं) क्रोष्टुकुलोत्सृष्टविकटकर्कटकर्परपरंपरा-
परिगत(प्रांतं⁸ अतितरळ)जलरयलुळितचतुळशफरकुलकब-
लनकृतमतिनिभृतबकशकुनिनिवह(बहु)धवळितपरिसरम्
अतिचपलजलकपिकुलविहरण(तुलिर⁹)सलिलकण[२७८]निकर(परिमि-
ळनशिशिरिततामालतलं अनुदिन)निपतदतितरुण[वन]महिषग-
वलशिखर(वि)लिखितविषमतटम् अनवरतचरदसितमुखचर-
णविहग(वर)निवह(मधुकर)निनद(मुखरित)हिमकर(कि-
रणनिकर)[२७९]रुचिरजलमनुज(गण)शयनमृदित(तटधरणी)-
तलम् अति(बहुळ)मद[जल]शबळ(कट¹⁰)तटकरि[वर]शतनिपतित-
मधुकर(निकरम्¹¹) अतिजवनपवनविधुतजल(विघटन)निप-
तित(फणि)गणपरिगतपरिसरं जलनिधि(जलगता)भुजगनिर्मु-
क्तनिर्मोकपट्टम् [इव] दर्पणम् इव वसुंधरायाः स्फटिककु-
ट्टिमम् इव वरुणस्य (कमलवनम् इव सपद्मरागं वनप्र-
¹ So also Hall's manuscripts, A, B, C, D, F, G, H.
² So also Hall's manuscript D.
³ So also Hall's manuscripts A, C, F, H.
⁴ So also Hall's manuscripts A, F, H. ⁵ So also Hall's manuscripts B, D.
⁶ So also Hall's manuscripts A, B, C, D, E, F, H, and the commentators Jagaddhara and Narasiṁha.
⁷ So also Hall's manuscripts A, B, C, D, E, F, G, H, and the commentator Narasiṁha.
⁸ So also Hall's manuscripts B, C, D, F, G, H.
⁹ Tel. ed. 61, Grantha ed., Trichinopoly ed., and Srirangam text, tulita.
¹⁰ This reading is also recorded by Śivarāma, ad loc.
¹¹ So also Hall's manuscripts A, B, F.