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सर्वकोश
वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 196, कुल 530 में से

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९४ वरिवस्यारहस्ये

नादों का क्रमाङ्क९ नाद या प्रणव के अवयवस्थानकलाएँअवस्थाआकारउच्चारण काल (काल की मात्रा या अवधि)पूर्ण ध्वनि की मात्राआकार का स्पष्टीकरण
४बिन्दुआज्ञा चक्र के ऊपर ललाट मेंज्योत्स्ना, ज्योत्स्नावती, सुप्रभा, विमला, शिवासुषुप्ति१२८ लव१/२दीप के सदृश वृत्ताकार
५अर्धचन्द्र<br>अर्द्धेन्दुबिन्दु के ऊपररुन्धती, रोधनी, रौद्री, ज्ञानबोधा, तमोपहा, निरोधिकातुर्यावस्था६४ लव१/४आधे चन्द्र के समान
६निरोधिकाअर्धचन्द्र के ऊपरइन्धिका, दीपिका, रोचिका, मोचिका३२ लव१/८त्रिकोणाकृति : चन्द्रिका की भाँति
७नादनिरोधिका के ऊपरऊर्ध्वग१६ लव१/१६दो बिन्दुओं के मध्य पद्मराग मणिवत दण्ड के समान
८नादान्तनाद के ऊपरसूक्ष्मा, सुसूक्ष्मा, अमृता, अमृतसंभवा, व्यापिनी८ लव१/३२वाम भाग में बिन्दु एवं हल के समान : तड़ित के समान