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सर्वकोश
वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

वरिवस्यारहस्य (भास्करराय मखी - सरोजिनी हिन्दी व्याख्या, कामकला व श्रीविद्या मन्त्र-दर्शन)

Varivasyarahasya of Bhaskararaya with Sarojini Hindi Commentary

भास्करराय मखी (टीकाकार: डॉ. श्यामकान्त द्विवेदी आनन्द) द्वारा

DevanagariHindipublished530 पृष्ठ

पृष्ठ 197, कुल 530 में से

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प्रथमोऽंशः ९५

नादों का क्रमाङ्क९ नाद या प्रणव के अवयवस्थानकलाएँअवस्थाआकारउच्चारण काल (काल की मात्रा या अवधि)पूर्ण ध्वनि की मात्राआकार का स्पष्टीकरण
९शक्तिनादान्त के ऊपरव्यापिनी, व्योमरूपा, अनन्ता, अनाथा, अनाश्रिता४ लव१/६४जिसमें दो तिरछे बिन्दु हों। वामबिन्दु से एक रेखा निकल रही हो। दक्षिण बिन्दु शिरा शून्य
१०व्यापिनी (व्यापिका)शक्ति के ऊपरसर्वज्ञा, सर्वगा, दुर्गा, सवना, स्पृहणा, धृति२ लव१/१२८बिन्दु से निकलता हुआ त्रिकोण
११समनाव्यापिनी के ऊपर१ लव१/२५६ऊर्ध्व एवं अधोभागस्थ बिन्दुद्वय से संयुक्त रेखाकृति
१२उन्मनासमना के ऊपरकालहीन१/५१२ऊर्ध्वबिन्दु से हीन
०नौ कलाएँ