सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja

महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा

DevanagariHindipublished368 पृष्ठ

पृष्ठ 96, कुल 368 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 96

शक्त्यधिकरण ] [ ७३
विमान का ऊर्ध्वगमन तो ऊर्ध्वा विद्युत् शक्ति की प्रेरणा से होता है, विमान का अधोगमन—
अधोगमन-नीचे आना अधरा विद्युत् शक्ति से, विमान की मण्डलगति-चक्रगति मण्डला विद्युत्
शक्ति से कहा-॥६ १४॥
वेगिनीशक्तितो यानगतिवैचित्र्यमुच्यते ।
अनुलोमाद् विमानस्य प्रादक्षिण्यगतिस्स्मृता ॥ १५ ॥
तिर्यग्गमनमित्याहुस्तिर्यञ्चीशक्तियोगत ।
पराङ्मुखीशक्तितस्स्याद् विमानस्य पराङ्मुखम् ॥ १६ ॥
विलोमशक्त्या यानस्यापसव्यगतिस्स्मृता ।
स्तम्भनाशक्तितो यानस्तम्भन परिकीर्तितम् ॥ १७ ॥
चित्राख्यशक्त्या यानस्य नानाविधगतिस्स्मृता ।
इति विद्युद्द्वादशकशक्तिकार्याण्यथाक्रमम् ॥ १८ ॥
उक्तानि विमानगतीरनुसृत्य यथाविधि ॥ १६ ॥ इत्यादि
वेगिनीशक्ति से विमान की विचित्र गति कही जाती है, विमान के अनुलोम से प्रादाक्षिण्य अर्थात्
अनुलोम गति, विमान की तिर्यक्—तिरछी गति तिर्यक् शक्ति के सम्बन्ध से, पराङ्मुखीशक्ति से विमान
की पराङ्मुखगति हो, विलोम शक्ति से विमान की अपसव्य—विलोमगति कही है, स्तम्भनाशक्ति से
यान की स्तम्भनगति कही है, चित्रानामक शक्ति से विमान की नानाविध गति कही जाती है। इस
प्रकार विद्युत् को १२ शक्तियों के कार्य यथाक्रम कहे हैं, विमान की गतियों का यथाविधि अनुसरण
करके ॥ १५—१६ ॥
शक्तयः पञ्चेति नारायणाः ॥ अ० ४ सू० २ ॥
बो० वृ०
मतान्तरविचारार्थं सूत्रोय परिकीर्तित ।
तदर्थबोधकपदान्युक्तान्यस्मिन् चतु * क्रमात् ॥ २० ॥
विमानगतिवैचित्र्यक्रियाकरणशक्तय ।
सयोजाताद्यप्रयन्त्रेण सञ्जाता पञ्च एव हि ॥ २१ ॥
इति नारायणमुनिस्स्वानुभूत्याब्रवीत् स्वयम् ।
तन्मताभिप्रायमेव सूत्रेऽस्मिन् सम्प्रदर्शित ॥ २२ ॥
तत्रादिमपदाच्छक्तिस्वरूपसन्निदर्शित ।
सङ्ख्या तत्प्रभेदस्तु द्वितीयपदतस्स्मृतः ॥ २३ ॥
मतान्तरप्रकटन तृतीयपदतस्स्मृतम् ।
मतप्रवर्तकमुनि तुरीयात् सम्प्रदर्शितम् ॥ २४ ॥
पदार्थमेव कथित विशेषाथोधुनोच्यते ।
सद्यो जातसमुद्भू ताश्शक्तय पञ्चधा स्मृता ॥ २५ ॥
विमानगतिवैचित्र्यक्रिया स्यादेभिरेव हि ॥ इत्यादि ।

  • विभक्तिलोप आर्षं ।