बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja
महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा
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पदार्थमेव कथित विशेषाथोऽधुनोच्यते ।
सोमसौण्डालमौक्तिकवर्गजाश्शास्त्रतः क्रमात् ॥ ७ ॥
ऊष्मपाणा(ना ?) बीजलोहास्त्रयस्त्रिंशदितीरिता ।
जिससे त्रिवर्गीय लोहों के संयोग से क्रमश ऊष्मप तैयार होते हैं अतः तन्मय—त्रिलोहमय
कहे गये हैं। पदों का अर्थ कह दिया विशेषार्थ कहा जाता है सोम, सौण्डाल, मौक्तिक वर्ग में होने
वाले लोहे शास्त्र से क्रमश ऊष्म लोहों के बीज लोहे ३३ कहे हैं ॥ ६-७ ॥
उक्तं हि लोहरत्नाकरे—कहा ही है लोहरत्नाकर पुस्तक में—
ऊष्मपाना बीजलोहास्त्रयस्त्रिंशदितीरिता ॥ ८ ॥
सोमसौण्डालमौक्तिकवर्गभेदाद् यथाक्रमम् ।
एकैकवर्गसङ्क्लृप्तलोहा एकादश क्रमात् ॥ ६ ॥
तेषा नामानि नामार्थकल्पोक्तानि यथाक्रमम् ।
सङ्गृह्यात्र प्रवक्ष्यामि सग्रहेण यथामति ॥ १० ॥
ऊष्मप लोहों के बीज लोहे ३३ कहे हैं, सोम; सौण्डाल, मौलिक वर्ग भेद से यथाक्रम एक
एक वर्ग से सम्बन्धित लोहे क्रम से ११ हैं। उनके नाम नामार्थकल्प ग्रन्थ में कहे यथाक्रम ( वहा से )
लेकर संक्षेप से यहा यथामति कहूँगा ॥ ८-१० ॥
सोमस्सौम्यक्सुन्दास्यस्सोम पञ्चाननोष्मप ।
शक्तिगर्भो जाङ्गलिक प्राणनश्शङ्खलाघव ॥ ११ ॥
इत्येकादशनामानि शक्तिसंकेतवर्णाके ।
सोमवर्गीयलोहाना प्रोक्तान्यत्र यथाक्रमम् ॥ १२ ॥
विरञ्चिसौर्यपश्शङ्कुरुष्णसूरणशिञ्जिका ।
कङ्कुरञ्जिकसौण्डीरमुग्धघुण्डरकस्तथा ॥ १३ ॥
इत्येकादशनामानि शास्त्रोक्तान्यत्र पूर्ववत् ।
मोण्डीरवर्गलोहाना सम्प्रोक्तानि यथाक्रमम् ॥ १४ ॥
अणुकश्च द्व्यणुक कङ्कुश्चत्र्यणुकश्श्वेताम्बर ।
मुदम्बरो बालगर्भंकुवचं कण्टकास्तथा ॥ १५ ॥
सोम, सौम्यक, सुन्दास्य, सोम, पञ्चानन, ऊष्मप, शक्तिगर्भ, जाङ्गलिक, प्राणन, शङ्खलाघव ये
११ नाम शक्ति संकेत के रंगों से युक्त सोम वर्ग बाले लोहों के यथाक्रम कहे है । विरञ्चि, सौर्यप, शंकु,
उष्ण, सूरण, शिञ्जिक, कंकु, रञ्जिक, सौण्डीर, मुग्ध, घुण्डारक, ये ११ नाम यथाक्रम सौण्डीर (सौण्डाल)
वर्ग वाले लोहों के हैं। अणुक, द्व्यणुक, कङ्कु, त्र्यणुक, श्वेताम्बर, मुदम्बर, बालगर्भ, कुवर्च,
कण्टक ॥ ११-१५ ॥
दिव्यङ्गलधिक इत्येकादशनामानि पूर्ववत् ।
मौक्तिकवर्गलोहानामुक्तान्यत्र यथाक्रमम् ॥ १६ ॥