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बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja

महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा

DevanagariHindipublished368 पृष्ठ

पृष्ठ 57, कुल 368 में से

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पृष्ठ 57

एते गुल्मास्सदा यन्तृभोजने पुष्टिवर्धना ।
सोमवल्ली चक्रिकादतुम्बिकारसवल्लिका ॥७१॥
कूष्माण्डवल्लिका चेक्षुवल्लिका पिष्टवल्लरी ।
सूर्यकान्ता चन्द्रकान्ता मेघनाद. पुनर्नवः ॥७२॥
अवन्ती वास्तु मत्स्या क्षीरुकमाया. पुष्टिवर्धना ।
पूर्वोक्तपिष्टमञ्जूषशर्कराद्या यथाक्रमम् ॥७३॥
विधिवच्छोदिते शास्त्रमुखात् सलभ्यते यदि ।
यो वा को वा भवेद् गुल्मलतादूर्वाद्य क्रमात् ॥७४॥
सत्वाहरणयोग्यास्ते बलपुष्टिविवर्धना. ।
शाकपुष्पतत्पन्नपल्लवादीना तथैव हि ॥७५॥
सत्वमत्युत्तम विद्यादाहारे यन्तृ णामिति ।
ये गुल्म सदा चालक यात्रियों के भोजन में पुष्टिवर्धक हैं । सोमवल्ली-सोमलता, चक्रिकाद ?,
तुम्बिका-घिया लौकी ?, रसवल्लिका ?, पेटा कद्दू लता, इक्षुवल्लिका-इक्षुवल्ली-कृष्णक्षीरविदारी,
पिष्टवल्लरी-पिष्टपर्णी, सूर्यकान्ता-आदित्यपर्णी, चन्द्रकान्ता-निर्गुण्डी-सम्भालू, मेघनाद-चौलाई,
पुनर्नवा, अवन्ती-राई, वास्तु-बथवा, मत्स्या-कुटकी, क्षीरुकमा ?-क्षीरपुष्पी-शङ्खपुष्पी, ये पुष्टि-
वर्धक हैं । पूर्व कहे चूर्ण लुगदी-गुड़ा दलिया या खाण्ड यथाक्रम विधिवत् शास्त्रमुख से प्राप्त होते
हैं । जो भी कोई भी गुल्म, लता, दूर्वा आदि ही क्रम से सत्त्व लेने योग्य हों वे बलपुष्टि बढ़ाने वाले हैं
शाक फूल पत्ते कोपल आदि आहार में उनके सत्त्व को यात्रियों के आहार में जाने ॥ ७१-७४ ॥
अथ लोहाधिकरणम् ॥
अब लोहे का अधिकरण प्रस्तुत किया जाता है ।
अथ यानलोहानि ॥ अ० १, सू० १३ ॥
बो० वृ०
यन्तॄणामाहारभेद. पूर्वाधिकरणे स्मृत ।
अथेदानीं यानलोहस्वरूपोस्मिन्निरूप्यते ॥७६॥
पदद्वय भवेदस्मिन् यानलोहविनिर्णये ।
तयोरानन्तर्यवाची स्यादादिमपदस्तथा ॥७७॥
यानक्रियार्हलोहानि प्रोक्तानि स्युर्द्वितीयत ।
पदार्थमेव कथित विशेषार्थोधुनोच्यते ॥७८॥
उक्तानि यानलोहानि शौनकीये यथाक्रमम् ।
तान्येवोदाहरिष्यामि विमानरचनाविधौ ॥७९॥
विमानचालक यात्रियों का आहारभेद पूर्व अधिकरण में कह दिया । अब यान के लोहे
का स्वरूप इस प्रकरण में निरूपित किया जाता है । इस सूत्र में दो पद विमानलोहे के निर्णय में हैं ।