बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja
महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंविमान के रहस्य ] [ ११
( ६ ) दृश्यरहस्यो नाम--आकाशमण्डले विद्युद्वातकिरणशक्तयो
परस्परसम्मेलनात्सञ्जातबिम्बकृच्छक्तेर्विमानपीठपुरोभागस्य विश्वक्रियादर्पणविले
प्रतिफल कृत्वा पश्चात्तत्प्रकाशसन्निवेशनद्वारा मायाविमानप्रदर्शनरहस्यम् ॥
( ६ ) दृश्य रहस्य विचार—आकाशमण्डल में विद्युत्किरण वातकिरण ( वातलहर ) इन
दोनों की शक्तियों के परस्पर सम्मेलन से उत्पन्न हुई बिम्बकरने वाली शक्ति से विमान-पीठ के सामने-
वाले भाग के विश्वक्रियादर्पणरूप बिल में प्रतिफल छाया करके पश्चात् उस प्रकाश के पड़ने से माया-
विमान के दिखलाई पड़ने का रहस्य है ॥
( ७ ) अदृश्यरहस्यो नाम—शक्तितन्त्रोक्तरीत्या सूर्यरथैषादण्डप्राङ्-
मुखपृष्ठकेन्द्रस्थवैष्णरव्यंविकरणादिशक्तिभिरा ( भि श्रा ? ) काशतरङ्गस्थ
शक्तिप्रवाहमाकृष्य वातमण्डलस्थवलाहाविकरणादिशक्तिपञ्चके नियोज्य
तद्द्वा ( द्वा ? ) राश्वेताभ्रमण्डलाकार कृत्वा तदावरणाद्विमानादृश्यकरण-
रहस्यम् ॥
(७) अदृश्य रहस्य विचार—शक्तितन्त्र की कही रीति के अनुसार सूर्यकिरण के एषादण्ड के
सामने पृष्ठ केन्द्र में रहने वाले वैष्णरण्य त्रिकरण* आदि शक्तियों से आकाशतरङ्ग के शक्तिप्रवाह को
खींच कर वायुमण्डल में रहने वाली वलाहा ( वलाहाका ) विकरण आदि पांच शक्तियों को नियुक्त करके
उनके द्वारा सफेद अभ्र मण्डलाकार करके उस आवरण से विमान के अदृश्य करने का रहस्य है ॥७॥
(८) परोक्षरहस्यो नाम—मेघोत्पत्तिप्रकरणोक्तशरन्मेघावरणषट्केषु
द्वितीया ( या ? ) वरणपथे विमानमन्तर्धाय विमानस्थशक्त्याकर्षणदर्पण-
मुखात्तन्मेघशक्तिमाहृत्य पश्चाद्विमानपरिवेषचक्रमुखे नियोजयेत् । तेन स्तम्भन-
शक्तिप्रसारणा भवति, पश्चात्तद्द्वा ( द्वा ? ) रा लोकस्तम्भनक्रियारहस्यम् ॥
(८) परोक्षरहस्य विचार—मेघोत्पत्ति प्रकरण में कहे शरद् ऋतुसम्बन्धी छ मेघावरणों के
द्वितीय आवरण मार्ग में विमान छिपकर विमानस्थ शक्ति का आकर्षण करने वाले दर्पण के मुख से
उस मेघशक्ति को लेकर पश्चात् विमान के घेरे वाले चक्रमुख में नियुक्त करे उससे स्तम्भनशक्ति का
फैलाव हो जाता है पुन उसके द्वारा स्तम्भनक्रिया रहस्य हो जाता है ॥
( ९ ) अपरोक्षरहस्यो नाम—शक्तितन्त्रोक्तरौहिणीविद्युत्प्रसारणेन
विमानाभिमुखस्थवस्तूना प्रत्यक्षनिदर्शनक्रियारहस्यम् ॥
(६) अपरोक्ष रहस्य विचार—शक्तितन्त्र में कहीं रोहिणी विद्युत्+ के फैलाने से + विमान
के सामने आने वाली वस्तुओं का प्रत्यक्ष दिखलाई देना रूप अपरोक्ष ( प्रत्यक्ष ) क्रिया रहस्य है ॥
- सूर्य पृथिवी के मध्य पृथिवी की गति रेखा के अनुसार कार्य करने वाला सूर्य-रथ-ईषा दण्ड, यह कोई
अङ्ग विमान का पारिभाषिक नाम से कहा गया है जिसके आगे पीछे और केन्द्र में वैष्णरध्य आदि
शक्तियां निकलती हो उनसे आकाश से शक्तिप्रवाह खींचा जाता हो ।
- यह रोहिणी विद्युत्—कोई फेंकने वाली सर्च लाईट की भांति लाईट होगी ।