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बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja

महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा

DevanagariHindipublished368 पृष्ठ

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पृष्ठ 33

१० ] [ बृहद् विमानशास्त्र
एवं उनके द्रावक तेल + आदि से भुवन ऐश्वर्य आदि मन्त्रानुष्ठानों से प्राप्त मन्त्रशक्ति ( विद्यायुक्त
विचारशक्ति ) एवं क्रियाशक्ति आदि से कलासंयोजन द्वारा अभेद्यता अच्छेद्यता अदाह्यता अविनाशिता
आदि गुणविशिष्ट विमानरचनारूप क्रियारहस्य विचार है ।
( २ ) तान्त्रिकरहस्यो नाम--महामायाशम्बरादितान्त्रिकशास्त्रोक्तता-
नुष्ठानमार्गात्तत्तच्छक्त्यनुसन्धानरहस्यम् ॥
( २ ) तान्त्रिकरहस्यविचार - महामाया शम्बर आदि तान्त्रिक शास्त्र में कहे अनुष्ठान मार्ग
से उस शक्ति का अनुसन्धानरहस्य विचार है ॥
( ३ ) कृतकरहस्यो नाम--विश्वकर्मच्छायापुरुषमनुमयादिशास्त्रानुष्ठान-
( नु ? ) द्वारा तत्तच्छक्त्यनुसन्धानपूर्वक तात्कालिकसङ्कल्पानुसारेण विमान-
रचनाक्रमरहस्यम् ॥
( ३ ) कृतक रहस्य विचार- विश्वकर्मा, छायापुरुष, मनु, मय ‡ आदि ( यन्त्राविष्कारक
महर्षियों के ) शास्त्रों के अनुष्ठान द्वारा उस शक्ति का अनुसन्धान खोज ध्यान तात्कालिक सङ्कल्प अर्थात्
तुरन्त नूतन कल्पना के अनुसार विमानरचनाक्रम रहस्य विचार है ।
( ४ ) अन्तरालरहस्यो नाम--आकाशपरिधिमण्डलशक्तिसन्धिस्थानेषु
विमानप्रवेशो यदा भवति तदोभय ( तदा उभय ? ) शक्तिसम्मर्दनेन चूर्णितो
भवति । अतो ( त ? ) विमानस्य तत्सन्धिप्रवेशसूचनात्तदन्तरालेषु विमान-
स्तम्भनक्रियाकरणरहस्यम् ॥
(४) अन्तरालरहस्य विचार-आकाशपरिधिमण्डल की शक्तियों के सन्धिस्थानों में जब विमान-
प्रवेश हो जाता है तो दोनों शक्तियों के सम्मर्दन से विमान चूर्णित हो जाता है टूट जाता है । अत
विमान के उस सन्धिप्रवेश की सूचना करने से उन अन्तरालों में विमानस्तम्भनक्रिया करने रूप रहस्य का
विचार होना चाहिये ।
( ५ ) गूढरहस्यो नाम--वायुतत्त्वप्रकरणोक्तरीत्या वातस्तम्भाष्टम-
परिधिरेखापथस्य यासावियासाप्रयासादिवातशक्तिभि सूर्यकिरणान्तर्गततम-
श्शक्तिमाकृष्य तत्संयोजनद्वारा विमानाच्छादनरहस्यम् ॥
( ५ ) गूढरहस्यविचार - वायुतत्त्व प्रकरण में कही रीति के अनुसार वातस्तम्भ की आठवीं
परिधि के रेखामार्ग की यासा वियासा प्रयासा आदि वातशक्तियों के द्वारा सूर्यकिरणान्तर्गत अन्धकार
शक्ति को आकृष्ट कर उसके संयोजनद्वारा विमानाच्छादन करना रहस्य है ॥

  • यन्त्र में तेल का उपयोग आवश्यक है अत कहा गया है ।
    ‡ विश्वकर्मा, छायापुरुष, मनु, मय आदि प्राचीन विमान आदि यान यन्त्र के आविष्कारक तथा उन उन
    शास्त्रों के रचयिता थे । वाल्मीकि रामायण में पुष्पक विमान का आविष्कारक विश्वकर्मा कहा ही है ।