बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja
महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६ ] [ बृहद् विमानशास्त्र
द्वारा कहे हुए उनके नामों को मै क्रम से कहूँगा । नारायण, शौनक, गर्ग, वाचस्पति, चाक्रायणि और
धुण्ढिनाथ ये ऋषि स्वयं शास्त्रकार हैं । विमानचन्द्रिका, व्योमयानतन्त्र, यन्त्रकल्प, यानबिन्दु, खेटयान-
प्रदीपिका और व्योमयानार्कप्रकाश ये छः शास्त्र क्रम से विशेष ज्ञानवेत्ता नारायण आदि मुनियों ने कहे
हैं । दयानिधि भरद्वाज ऋषि ने इन शास्त्रों को भली प्रकार विचार कर सर्वलोकोपकारक 'वैमानिक
प्रकरण' पारिभाषिक रूप से विस्तार से रचा है ❁ ॥ २६—३७ ॥
अथ विमानशब्दार्थविचार .—
वेगसाम्याद् विमानोऽण्डजानामिति ।। अ० १ । सू० १ ॥
सूत्रशब्दार्थ—अण्डजों अर्थात् पक्षियों के वेगसाम्य से विमान कहलाता है ।
बोधानन्दवृत्ति —
अण्डजेत्यत्र सूत्रेस्मिन् गृध्राद्या पक्षिण स्मृता ।
आकाशगमने तेषां वेगशक्ति स्ववेगत ।। १ ।।
य समर्थो विशेषेण मातुं गणितसंख्यया ।
स विमान इति प्रोक्तो वेगसाम्याच्च शास्त्रत ।। २ ।।
यद्वा—
गृध्रादिपक्षिणा वेगसाम्य यस्यास्ति वेगत ।
स विमान इति प्रोक्त (क्तो ?) आकाशगमने क्रमात् ।।३।।
इस सूत्र में "अण्डजानाम्" पद से गृध्र आदि पक्षी कहे गये हैं आकाशगमन मे उनकी
वेगशक्ति को जो स्ववेग से गणितसंख्या द्वारा विशेषरूपेण मापने तुलित करने में समर्थ हो वह वि-मान
पक्षी के मान होने से अर्थात् वेगसाम्य से और शास्त्रानुसार ( शब्दशास्त्रानुसार ) विमान कहा गया है ।
अथवा आकाशगमन में गृध्र आदि पक्षियों के वेग की समता क्रमशः जिसके वेग से हो सकती है वह
विमान कहा गया है + ॥ १—३ ॥
इत्थम्भावेति x शब्दस्स्याद् (दस्याद् ?) विमानार्थविनिर्णये—
लल्लोपि—
विसोप ( म ) ान गमने येषामस्ति खमण्डले ।
ते विमाना इति प्रोक्ता यानशास्त्रविशारदै ।। ४ ।।
- महर्षि भरद्वाज के रचे 'वैमानिक प्रकरण' से पूर्व विमानशास्त्र के ग्रन्थ 'विमानचन्द्रिका, व्योमयानतन्त्र,
यन्त्रकल्प, यानबिन्दु, खेटयानप्रदीपिका, व्योमयानार्कप्रकाश' ये छह थे ।
- ऋग्वेद मे भी श्येन की उपमा उडने मे विमान यान को दी है "आ वा रथो अश्विना श्येनपत्वा सुमृलीक
स्ववा यात्वर्वाङ् ।” ( ऋ० १।११८।१ )
x इत्थम्भाव इति—इत्थम्भावेति सन्धिराषं पुरातनप्रयोगो वा ।