बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)
Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja
महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा
पृष्ठ 273, कुल 368 में से
संदर्भ में पढ़ें१० बालिश्त उठा हुआ गोल आवरण भी साढ़े नौ बालिश्त प्रमाण से कढ़ा है। शास्त्र से
वातपा यन्त्र का प्रमाण कह दिया है। अन्दर घूमने वाले तारों से लपेटा हुआ हो उसके भीतरी मुख में
एक नाल लगाई हो। घूमने वाले तारों के नाल में अन्दर बातसञ्चार होगा, उसके बाहिर गरम तैल ज्वलन-
शक्ति वेग से--॥ ११२-११५ ॥
भवेत्सन्तापितो वायुश्शतकक्ष्यप्रमाणात. ।
एतत्सन्तापित वायुमोष्म्ययन्त्रे नियोजितुम् ॥ ११६ ॥
बाह्यस्यशीतवायोराकर्षणाय तदन्तरे ।
नालाश्च कीलका एतद्यन्त्रे सन्धारिता क्रमात् ॥ ११७ ॥
तैलज्वालासमुत्पन्नधूम वेगान्मुहुर्मुहुः ।
बाह्ये' नियोजितु यन्त्रात्स्तम्भमूलावधि क्रमात् ॥ ११८ ॥
षडङ्गुलगात्रनाला यन्त्रेऽस्मिन् सम्प्रतिष्ठिताः ।
बाह्यस्थ पूर्वोक्तशीतवायु यन्त्रान्तरे क्रमात् ॥ ११९ ॥
नियोजितुं पुनर्वातयन्त्रा