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सर्वकोश
बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

बृहद्विमानशास्त्रम् / वैमानिक शास्त्र (महर्षि भरद्वाज - पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Brihad Viman Shastra / Vaimanika Shastra of Maharshi Bharadvaja

महर्षि भरद्वाज (टीकाकार: पं. ब्रह्ममुनि परिव्राजक) द्वारा

DevanagariHindipublished368 पृष्ठ

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पृष्ठ 223

२०० ] [ बृहद् विमानशास्त्रं
तस्मादुक्तं समासेन शब्दाकर्षणयन्त्रकम् ॥ ६ ॥
शब्दाकर्षणयन्त्रास्तु द्वात्रिंशद्भेदत क्रमात् ।
शास्त्रेषु निर्णितास्सम्यग्यन्त्रशास्त्रविशारदै ॥ १० ॥
एतच्छब्दाकर्षणयन्त्र यानाङ्गत पृथक् ।
कुतस्तित्ववगन्तव्य सर्वशास्त्रप्रमाणत ॥ ११ ॥ इत्यादि ॥
उस उस दिशा से आये हुए शब्द को सुनकर बुद्धिमान् यन्त्रचालक परचक्र के सब विचार
को यन्त्र से जान कर अपने विमान की रक्षा के लिये यह कर्तव्य है यह जान कर प्रयत्न करे अन्यथा
नाश को प्राप्त हो जावे । अत संक्षेप से शब्दाकर्षण यन्त्र कहा । शब्दाकर्षण यन्त्र ३२ भेद के शास्त्रों
में यन्त्रशास्त्र विद्वानो ने क्रमश कहे हैं, यह शब्दाकर्षण यन्त्र विमानयान का अङ्गरूप से है ॥७-११॥
एतद्यन्त्रोपयुक्तं वस्तुस्वरूपवर्णनम्--इस यन्त्र के उपयुक्त वस्तु स्वरूप वर्णन है--
वैडालिकलोहमुक्तं लोहसर्वस्वे--वैडालिक लोहा कहा है लोहसर्वस्व में--
द्विवक्त्रशङ्करकान्तवज्रकमठा