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सर्वकोश
उपवनविनोद (आचार्य शार्ङ्गधर - वृक्षायुर्वेद, भू-जल संधान एवं उद्यान-विज्ञान सटीक)

उपवनविनोद (आचार्य शार्ङ्गधर - वृक्षायुर्वेद, भू-जल संधान एवं उद्यान-विज्ञान सटीक)

Upavanavinoda of Sharngadhara with Commentary

आचार्य शार्ङ्गधर (सम्पादक: पं. गिरिजाप्रसाद) द्वारा

DevanagariHindipublished134 पृष्ठ

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पृष्ठ 48

तद्गृहं न प्ररोहति ॥२८ Wait, footnote index afterयस्यisd: यस्यᵈ`.

  • Verse 29:
    पलाशाः काञ्चनाराश्च तथा श्लेष्मातकार्जुनाः ।
    करञ्जश्चेत्यमी वृक्षा न रोप्याः सुखिना गृहेᵉ ॥२९
  • Verse 30:
    आसन्नाः कण्टकिनो रिपुभयदाः क्षीरिणोर्थनाशाय ।
    फलिनः प्रजाक्षयकरा दारुयपि वर्जयेत्तेषाम्ᶠ ॥३०
    Wait, let's re-verify दारुयपि:
    Could it be दारुण्यपि?
    Wait, look at दारु: दा रु
    Then the next glyph:
    It has a vertical on the left? No!
    Wait! In Bengali or Devanagari? It's Devanagari script.
    In Devanagari: ण्य is ण joined to य.
    Half-ण is ण without vertical bar (i.e. just the loop: ण्), followed by य: ण्य!
    Wait! Does it have the half-ण loop?
    Look closely at दारु... then there is a loop!
    Wait