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त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 86, कुल 208 में से

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पृष्ठ 86

58 त्रिशतिका
गुणा करके इच्छा (c) से भाग देकर अज्ञात राशि (d) का प्राप्त कर सकते हैं। इस
नियम के अनुसार हम यह सूत्र प्राप्त करते हैं-
प्रमाण (a) ×प्रमाणफल (b)
इच्छाफल (d) = ─────────────────────
इच्छा (c)
इस नियम को प्रस्तुत उदाहरण में समन्वित करते हैं-
अष्टसेतिकहारेण मापिता हारविंशतिः।
सा षट् सेतिकहारेण का संख्या भवितोच्यताम्।। ४०।।
न्यासः 8/1 20/1 6/1 लब्धं हाराः 26 २/३
सुक्षेमा अनुवाद-कुछ सेतिका या मोतियों में से 8-8 मोतियों वाले 20 हार
बनते हैं, तो उतने ही मोतियों में से 6-6 मोतियों वाले कितने हार बनेंगे।
अनुशीलन-यहाँ पूर्वोक्त श्लोक का अर्थ परिवर्तित करके व्युत्क्रमानुपात के
रूप में प्रस्तुत किया गया है।
यहाँ 8 सेतिका वाला हार प्रमाण (a) है। 20 हार प्रमाणफल (b) तथा 6
सेतिका वाला हार इच्छा है। अतः अज्ञात राशि (d) के लिये सूत्रानुसार-
8×20 = 160 = 26 २/३ हार
────── ─────
6 6
यहाँ प्रस्तुत प्रश्नों में 8 तथा 20 इस मान का व्युत्क्रमानुपाती संगत मान प्राप्त
किया गया है। यहाँ तुलना के लिये इन मानों के व्युत्क्रमानुपाती तथा समानुपाती
संगत मान इस तालिका में प्रस्तुत करते हैं-
व्युत्क्रमानुपाती | अनुक्रमानुपाती
मोती x 8ᵃ 6ᶜ | x 8 6
हार y 20ᵇ 26 २/३ᵈ | y 26 २/३ 20
तालिका से स्पष्ट है कि अनुक्रमानुपाती में x के पदों का जो अनुपात है
ठीक वही अनुपात इसके संगत y पदों का भी है। क्योंकि-
8× ३/४ = 6 तथा ८०/३ × ३/४ = 20
────────────────────────────────────────────────────────
१. मुक्ताफलानामष्टभिरिष्टभिः सेतिकैरैकैको हारः कृतः, विंशतिश्च हारा जाताः।
त एव मुक्ताहारा मुक्तावलीकृताः षट्सेतिकहारकल्पनया कियन्तो भवन्ति।। - पाटी-गणित
उदा. 34 पर व्याख्या