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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 87, कुल 208 में से

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पृष्ठ 87

त्रिशतिका 59
पर व्युत्क्रमानुपाती तालिका में x के पदों के अनुपात के ठीक विपरीत y
के संगत पदों का है। यह तालिका से स्पष्ट है तथा इस प्रकार भी–
8× ¾ = 6 तथा 20× 4/3 = 80/3
इससे स्पष्ट है कि व्युत्क्रमानुपात में x में प्रथम पद के सापेक्ष दूसरे पद का
अनुपात जितना घटता (या बढ़ता) है, उसके संगत y के प्रथम पद के सापेक्ष दूसरे
पद का अनुपात ठीक उतना ही बढ़ता (या घटता) है। इस स्थिति में व्युत्क्रमानुपात
का विवरण इस प्रकार प्राप्त होता है–
प्रमाण (a) / इच्छाफल (d) = इच्छा (c) / प्रमाणफल (b)
अतः स्वभावतः समीकरण यह प्राप्त होता है–
a × b = c × d
इससे यह समीकरण प्राप्त होता है–
इच्छाफल (d) = [प्रमाण (a) × प्रमाणफल (b)] / इच्छा (c)
इस प्रकार हमने बीजगणितीय समीकरण की विधि से उक्त सूत्र पुनः प्राप्त
कर लिया है। इससे यह भी सिद्ध है कि त्रिशतिका का यह सूत्र वास्तव में
व्युत्क्रमानुपात के एक अज्ञात पद को खोजने का उपाय है।
अन्यदुदाहरणम्
पञ्चरक्तिकमाषेण सुवर्णानां शतत्रयम्।
षष्टिरक्तिकमाषेण¹ का संख्या भवितोच्यताम्॥
5। 300। 60। लब्धं 25।।
सुक्षेमा अनुवाद-यदि 5 रक्तिक (रत्ती) वाले 'माष' वाले तोल से 300
सुवर्ण तोले जाते हैं, तो 60 रत्ती वाले माष वाले तोल से कितने सुवर्ण तुलेंगे।
अनुशीलन-सूत्रानुसार–
(5 × 300) / 60 = 1500 / 60 = 25 सुवर्ण
१. तत् षड्रक्तिक माषेण...पाटी-गणित श्लोक 35
स्पष्टतः 6 रत्ती वाले तोल से 250 सुवर्ण प्राप्त होंगे।