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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 80, कुल 208 में से

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पृष्ठ 80

52 त्रिशतिका
समानुपात में संगत पदों का वज्रगुणन फल या व्युत्क्रम गुणनफल बराबर होता है।
इस समीकरण से पुनः वही सूत्र प्राप्त करने में सक्षम हो जाते हैं, जिसका
उल्लेख त्रिशतिकाकार ने किया है-
इच्छाफल (d) = [प्रमाणफल (b) × इच्छा (c)] / प्रमाण (a)
उपर्लिखित विवेचना का निष्कर्ष यह है कि-
I. त्रैराशिक नियम के सभी प्रश्न संगत समानुपात के प्रश्न हैं। इसमें संगत
समानुपात की एक अज्ञात राशि का पता लगाया जाता है।
II. इसमें दो राशियों को विभाजन की विधि से या 1 के सापेक्ष तुलना द्वारा
अनुपात स्थापित किया जाता है।
III. पुनः संगत समानुपात की एक राशि के ज्ञान होने पर दूसरी अज्ञात
समानुपातिक राशि को पहचाना जाता है।
IV. इसके लिये सीधे उपर्लिखित अंकगणितीय सूत्र का या ऐकिक नियम
का या बीजगणितीय समीकरण का उपयोग किया जाता है। प्रत्येक विधि से वही
सूत्र तथा ठीक वही परिणाम प्राप्त होता है।
अन्यदुदाहरणम्
मरिचपलं सत्र्यंशं पणेन यदि लभ्यते सपादेन।
तत् त्र्यंशोनैर्दशभिः पणैः कियत् कथ्यतामाशु।। ३१।।
न्यासः 1 1 10
1/4 1/3 1/3 लब्धं पलानि 10 । कर्षम् 1
माषा 3 । गुञ्जाः 4 । भागाश्च 4/9
सुक्षेमा अनुवाद-यदि 1 1/4 या 5/4 पण से 1 1/3 = 4/3 पल मरिच मिलती है तो
10 - 1/3 = 29/3 पण में कितनी प्राप्त होगी।
यहाँ 5/4 प्रमाण (a), 4/3 प्रमाणफल (b) तथा 29/3 इच्छा (c) है। अतः पूर्वोक्त
सूत्रानुसार-
इच्छा-फल (d) = [(4/3) × (29/3)] / (5/4) = [116 × (4/5)] / 9 = 464/45 पल मरिच
464/45 = 10 14/45 पल, 14/45 × 4 = 56/45 = 1 11/45 कर्ष