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सर्वकोश
त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

त्रिशतिका: पाटीगणितसार (श्रीधराचार्य - पं. सुद्युम्नाचार्य सविस्तार हिन्दी व्याख्या)

Trishatika / Patiganitasara of Sridharacharya with Hindi Commentary

श्रीधराचार्य (टीकाकार: पं. सुद्युम्नाचार्य) द्वारा

DevanagariHindipublished208 पृष्ठ

पृष्ठ 81, कुल 208 में से

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पृष्ठ 81

त्रिशतिका 53
11/45 × 16 = 176/45 = 3 41/45 माष, 41/45 × 5 = 205/45 = 4 25/45 गुंजा
25/45 = 5/9 गुंजा के भाग।
ऐकिक नियम द्वारा प्रश्न का हल-
5/4 पण में 4/3 पल
∴ 1 पण में 4/3 × 4/5 = 16/15 पल
∴ 29/3 पण में 29/3 × 16/15 = 464/45 पल
बीजगणितीय समीकरण द्वारा प्रश्न का हल-
a b c d
हम देखते हैं कि- 5/4 : 4/3 :: 29/3 : x
अतः-
a × d = b × c के अनुसार-
5/4 x = 4/3 × 29/3
⇒ x = 4/3 × 29/3 × 4/5 = 464/45
यह पूर्वोक्त सूत्र के सर्वथा समकक्ष है।
खारीषष्टिः सार्धा रूपशतेन त्रिभागयुक्तेन।
यदि कथय ततो धान्यं रूपस्यैकस्य किं भवति॑॥ ३२॥
न्यासः 60 100 1
1/2 1/3 1 लब्धं खारी 0। द्रोणाः 9
आढकौ 2। प्रस्थौ 2। कुडवः 1। कुडवभागश्च 139/301
सुक्षेमा अनुवाद-100 1/3 या 301/3 रूप से 60 1/2 या 121/2 खारी धान्य प्राप्त होता
है, तो 1 रूप से कितना धान्य प्राप्त होगा।
अनुशीलन-सूत्रानुसार-
121/2 × 3/301 = 363/602 खारी धान्य। पूर्णांक खारी
363/602 × 16 = 2904/301 = 9 195/301 द्रोण, 195/301 × 4 = 780/301 = 2 178/301 आढक
178/301 × 4 = 712/301 = 2 110/301 प्रस्थ, 110/301 × 4 = 440/301 = 1 139/301 कुडव
१. तुल. पाटी-गणित उदा. 28