विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)
Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan
केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें६४ विवाहवृन्दावनम्- [ षड्वर्ग-
भा०--गण्डान्त, वैधृति, और संक्रान्ति से पूर्व, पश्चात् १६, १६, घड़ी
अर्धयाम, व्यतीपात, भद्रा, कुलीक इन दोषों से लग्न भंग कहा गया है । इन दोषों
में कुलिक का मान कहते हैं--१४ में २, २, घटाने से ( अर्थात् १४, १२,
१०, ८, ६, ४, २ ये मुहूर्त ) क्रम से सूर्यादिवारों में कुलिक होते हैं । और
दिन के मुहूर्त संख्या में १ घटाने से रात्रि की मुहूर्त संख्या होती है । तथा तिथि,
नक्षत्र, वार सम्बन्धी जो अन्य दोष हैं वे नेपाल, बङ्गाल और हूण ( काश्मीर से
उत्तरपश्चिम ) देश से भिन्न देशों में त्याज्य नहीं हैं ॥ १२ ॥
अथ होरादिषड्वर्गं कथयति-
राश्यंशाः शशिभूगुणेक्षणहतास्तिथ्यभ्रभूदिक्शरै-
र्भक्ता भार्धदृकाणनन्ददिनकृद्भागा गृहं यस्य यत् ।
त्रिंशांशाः सितसौम्यजीवरविजक्ष्माजन्मनां व्युत्क्रमा-
दोजर्क्षेषु शराश्वसर्पमरुतः पञ्चेति षड्वर्गिका ॥१३॥
सं०-राश्यंशाः ( लग्नस्य, ग्रहस्य वा राशिमुक्तांशाः) शशि-भूगुणे-
क्षणहताः पृथक् क्रमेण तिथ्यभ्रभूदिक्शरैः भक्ताः क्रमशः भार्ध-दृकाण-
नन्द-दिनकृद्भागाः ( होरा-दृकाण-नवांश-द्वादशांशाः ) भवन्ति । तथा यस्य
यद् गृहं तत् तस्य गृहम् । समराशिषु सितसौम्यजीवरविजक्ष्माजन्मनां
क्रमेण शराश्वसर्पमरुतः पञ्च इति त्रिंशांशाः स्युः, ओजर्क्षेषु व्युत्क्रमात्
त्रिंशाशा ज्ञेयाः, इति ( इयं ) षड्वर्गिका स्यात् ॥ १३ ॥
भा०-ग्रह वा भाव जिसका षड्वर्ग विचार करना हो उसके राशि को छोड़
कर केवल अंश को १, १, ३, २ से गुणाकर पृथक् पृथक् १५, १०, १०, ५ से
भाग देने से क्रम से होरा, दृकाण, नवांश और द्वादशांश होते हैं । तथा जिसकी
जो राशि है वही उसका गृह कहाता है । और समराशियों में--शुक्र, बुध,
बृहस्पति, शनि और मंगल के क्रम से ५, ७, ८, ५ और ५ अंश तथा विषम
राशियों में उत्क्रम से ( अर्थात् मंगल, शनि, बृहस्पति, बुध और शुक्र के ५, ५,
८, ७ और ५ अंश त्रिंशांश होते हैं । यह षड्वर्गी ( षड्वर्ग ) है ॥ १३ ॥
अथ राश्यधिपान् कथयति-
कुजकवीन्दुजचन्द्ररवीन्दुजाः सितकुजेज्ययमार्कजसूरयः ।
भवनपा लवपाश्च तदादयस्त्वजमृगाननतौलिकुलीरकाः ॥१४॥