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सर्वकोश
विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

विवाह वृन्दावनम् (पं. सीताराम झा ज्योतिष टीका - विवाह संस्कार, अष्टकूट गुण-मिलान एवं मुहूर्त विज्ञान सटीक)

Vivaha Vrindavanam: Vivaha Sanskara, Ashtakuta Guna Milana evam Muhurta Vigyan

केशवार्कमहोदय (टीकाकार: पं. सीताराम झा) द्वारा

DevanagariHindipublished138 पृष्ठ

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११८ विवाहवृन्दावनम्- [ लग्नशुद्धि-
उपरोक्तरीति से साधित चरखण्डों को घटाना, फिर लंकोदय को विलोमविधि से
रखकर उनमें उत्क्रम से चरखण्डों को जोड़ना तो ये मेषादि ६ राशियों के
उदयपल होते हैं । फिर यही उत्क्रम से तुलादि ६ राशियों के स्वदेशोदयपल
होते हैं ॥ ९ ॥
उदाहरण—लग्नप्रदीप के प्रथमभाग में स्पष्ट दिखलाया गया है ।
अथ संक्रान्तिज्ञानात् स्पष्टार्कसाधनम्-
अष्टाक्षाः नगपञ्च सप्तविषयाः सप्तैषवोऽष्टैषवो
गोऽक्षाः शून्यरसाः कुषड्विधुरसाः कङ्गानि शून्यर्तवः ।
गोक्षा मेषमुखेषु भास्करगतिर्निघ्ना दिनाद्यैर्गतैः
संक्रान्तेः खरसैर्हताऽऽप्तलवयुग् यातर्क्षमिष्टो रविः ॥१०॥
सं०—अष्टाक्षाः ५८, नगपञ्च ५७, सप्तविषयाः ५७, सप्तैषवः ५७,
अष्टैषवः ५८, गोक्षाः ५९, शून्यरसाः ६०, कुषट् ६१,