तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
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अध्याय - ५
बन्धेऽधिकौ पारिणामिकौ च ॥३७॥
[ च ] और [ बन्धे ] बन्धरूप अवस्था में [ अधिकौ ] अधिक
गुण वाले के परमाणुओं जितने गुण रूप में [ पारिणामिकौ ]
(कम गुण वाले परमाणुओं का) परिणमन होता है। (यह
कथन निमित्त का है।)
गुणपर्ययवत् द्रव्यम् ॥३८॥
[ गुणपर्ययवत् ] गुण-पर्याय वाला [ द्रव्यम् ] द्रव्य है।
कालश्च ॥३९॥
[ कालः ] काल [ च ] भी द्रव्य है।