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तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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पृष्ठ 90

अध्याय - ५
न जघन्यगुणानाम् ॥३४॥
[ जघन्यगुणानाम् ] जघन्य गुण सहित परमाणुओं का [ न ]
बन्ध नहीं होता।
(There is) no combination between the lowest
degrees of the two properties.
गुणसाम्ये सदृशानाम् ॥३५॥
[ गुणसाम्ये ] गुणों की समानता हो तब [ सदृशानाम् ] समान
जाति वाले परमाणु के साथ बन्ध नहीं होता। जैसे कि - दो
गुण वाले स्निग्ध परमाणु का दूसरे दो गुण वाले स्निग्ध
परमाणु के साथ बन्ध नहीं होता अथवा जैसे स्निग्ध परमाणु
का उतने ही गुण वाले रूक्ष परमाणु के साथ बन्ध नहीं
होता। न - (बन्ध नहीं होता) यह शब्द इस सूत्र में नहीं
कहा परन्तु ऊपर के सूत्र में कहा गया ‘न’ शब्द इस सूत्र में
भी लागू होता है।
(There is no combination) between equal degrees of
the same property.
द्व्यधिकादिगुणानां तु ॥३६॥
[ द्व्यधिकादिगुणानां तु ] दो अधिक गुण हों इस तरह के
गुण वाले के साथ ही बन्ध होता है।
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