सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

पृष्ठ 59, कुल 177 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 59

अध्याय - ३
उत्तरा दक्षिणतुल्याः ॥२६॥
विदेह क्षेत्र से उत्तर के तीन पर्वत और तीन क्षेत्र, दक्षिण के
पर्वत और क्षेत्रों के समान विस्तार वाले हैं।
Those in the north are equal to those in the south.
भरतैरावतयोर्वृद्धिह्रासौ
षट्समयाभ्यामुत्सर्पिण्यवसर्पिणीभ्याम् ॥२७॥
छह कालों से युक्त उत्सर्पिणी और अवसर्पिणी के द्वारा भरत
और ऐरावत क्षेत्र में जीवों के अनुभवादि की वृद्धि-हानि होती
रहती है।
In Bharata and Airāvata there is rise and fall
(regeneration and degeneration) during the six
periods of the two aeons of regeneration and
degeneration.
ताभ्यामपरा भूमयोऽवस्थिताः ॥२८॥
भरत और ऐरावत क्षेत्र को छोड़कर दूसरे क्षेत्रों में एक ही
अवस्था रहती है - उनमें काल का परिवर्तन नहीं होता।
The regions other than these are stable.
46