तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
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अध्याय - ३
एकद्वित्रिपल्योपमस्थितयो
हैमवतकहारिवर्षकदैवकुरवकाः ॥२९॥
हैमवतक, हारिवर्षक और देवकुरु (विदेहक्षेत्र के अन्तर्गत एक
विशेष स्थान) के मनुष्य, तिर्यंच क्रम से एक पल्य, दो पल्य
और तीन पल्य की आयु वाले होते हैं।
The human beings in Haimvata, Hari and
Devakuru are of one, two and three palyas
respectively.
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तथोत्तराः ॥३०॥
उत्तर के क्षेत्रों में रहने वाले मनुष्य भी हैमवतकादिक के
मनुष्यों के समान आयु वाले होते हैं।
The condition is the same in the north.
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विदेहेषु सङ्ख्येयकालाः ॥३१॥
विदेह क्षेत्रों में मनुष्य और तिर्यंचों की आयु संख्यात वर्ष की
होती है।
In Videhas the lifetime is numerable years.
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