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सर्वकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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पृष्ठ 39

अध्याय - २
The movement of a (liberated) soul is without a
bend.
विग्रहवती च संसारिणः प्राक्चतुर्भ्यः ॥२८॥
[ संसारिणः ] संसारी जीव की गति [ चतुर्भ्यः प्राक् ] चार
समय से पहिले [ विग्रहवती च ] वक्रता-मोड़ सहित तथा
रहित होती है।
The movement of the transmigrating souls is with
bend also prior to the fourth instant.
एकसमयाऽविग्रहा ॥२९॥
[ अविग्रहा ] मोड़ रहित गति [ एकसमया ] एक समय मात्र
ही होती है अर्थात् उसमें एक समय ही लगता है।
Movement without a bend (takes) one instant.
एकं द्वौ त्रीन्वाऽनाहारकः ॥३०॥
विग्रहगति में [ एकं द्वौ वा त्रीन् ] एक दो अथवा तीन समय
तक [ अनाहारकः ] जीव अनाहारक रहता है।
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