तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
DevanagariHindipublished177 पृष्ठ
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अध्याय - २
The five-sensed beings with minds are called
samjñī jīvas.
विग्रहगतौ कर्मयोगः ॥२५॥
[ विग्रहगतौः ] विग्रहगति में अर्थात् नये शरीर के लिये गमन
में [ कर्मयोगः ] कार्मण काययोग होता है।
In transit from one body to another, (there is)
vibration of the karmic body only.
अनुश्रेणि गतिः ॥२६॥
[ गतिः ] जीव पुद्गलों का गमन [ अनुश्रेणि ] श्रेणी के
अनुसार ही होता है।
Transit (takes place) in rows (straight lines) in
space.
अविग्रहा जीवस्य ॥२७॥
[ जीवस्य ] मुक्त जीव की गति [ अविग्रहा ] वक्रता रहित
सीधी होती है।
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