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सर्वकोश
तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

पृष्ठ 40, कुल 177 में से

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पृष्ठ 40

अध्याय - २
For one, two, or three instants (the soul remains)
non-assimilative.
सम्मूर्च्छनगर्भोपपादा जन्म ॥३१॥
[ सम्मूर्च्छनगर्भउपपादाः ] सम्मूर्च्छन, गर्भ और उपपाद तीन
प्रकार का [ जन्म ] जन्म होता है।
Birth is by spontaneous generation, from the
uterus or in the special bed.
सचित्तशीतसंवृताः सेतरा मिश्राश्चैकशस्तद्योनयः ॥३२॥
[ सचित्त शीत संवृताः ] सचित्त, शीत, संवृत [ सेतरा ]
उससे उलटी तीन – अचित्त, उष्ण, विवृत [ च एकशः
मिश्राः ] और क्रम से एक एक की मिली हुई तीन अर्थात्
सचित्ताचित्त, शीतोष्ण और संवृतविवृत [ तत् योनयः ] ये नव
जन्मयोनियाँ हैं।
Living matter, cold, covered, their opposites, and
their combinations are the nuclei severally.
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