तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)
Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary
आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा
पृष्ठ 23, कुल 177 में से
संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - १
क्षयोपशमनिमित्तः षड्विकल्पः शेषाणाम् ॥२२॥
[ क्षयोपशमनिमित्तः ] क्षयोपशमनैमित्तक अवधिज्ञान
[ षड्विकल्पः ] अनुगामी, अननुगामी, वर्धमान, हीयमान,
अवस्थित और अनवस्थित - ऐसे छह भेदवाला है, और वह
[ शेषाणाम् ] मनुष्य तथा तिर्यंचों के होता है।
Clairvoyance from destruction-cum-subsidence (i.e.
arising on the lifting of the veil) is of six kinds. It is
acquired by the rest (namely human beings and
animals).
ऋजुविपुलमती मनःपर्ययः ॥२३॥
[ मनःपर्ययः ] मनःपर्ययज्ञान [ ऋजुमतिविपुलमतिः ]
ऋजुमति और विपुलमति दो प्रकार का है।
Ṛjumati and vipulmati are the two kinds of
telepathy (manahparyaya).
विशुद्ध्यप्रतिपाताभ्यां तद्विशेषः ॥२४॥
[ विशुद्ध्यप्रतिपाताभ्यां ] परिणामों की विशुद्धि और
अप्रतिपात अर्थात् केवलज्ञान होने से पूर्व न छूटना
[ तद्विशेषः ] इन दो बातों से ऋजुमति और विपुलमति ज्ञान
में विशेषता (अन्तर) है।
10