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तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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पृष्ठ 163

अध्याय - १०
धर्मास्तिकायाभावात् ॥८॥
[ धर्मास्तिकायाभावात् ] आगे (अलोक में) धर्मास्तिकाय का
अभाव है अतः मुक्त जीव लोक के अन्त तक ही जाता है।
As there is no medium of motion.
क्षेत्रकालगतिलिंगतीर्थचारित्रप्रत्येकबुद्धबोधित-
ज्ञानावगाहनान्तरसंख्याल्पबहुत्वतः साध्याः ॥९॥
[ क्षेत्रकालगतिलिंगतीर्थचारित्रप्रत्येकबुद्धबोधित-
ज्ञानावगाहनान्तरसंख्याल्पबहुत्वतः ] क्षेत्र, काल, गति, लिंग,
तीर्थ, चारित्र, प्रत्येकबुद्धबोधित, ज्ञान, अवगाहना, अन्तर,
संख्या और अल्पबहुत्व - इन बारह अनुयोगों से [ साध्याः ]
मुक्त जीवों (सिद्धों) में भी भेद सिद्ध किये जा सकते हैं।
The emancipated souls can be differentiated with
reference to the region, time, state, sign, type of
Arhat, conduct, self-enlightenment, enlightened by
others, knowledge, stature, interval, number, and
numerical comparison.
॥ इति तत्त्वार्थाधिगमे मोक्षशास्त्रे दशमोऽध्यायः ॥
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