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तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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पृष्ठ 164

कोटिशतं द्वादश चैव कोट्यो लक्षाण्यशीतिस्त्र्यधिकानि चैव।
पंचाशदष्टौ च सहस्त्रसंख्यामेतद्श्रुतं पञ्चपदं नमामि ॥
अरहंतभासियत्थं गणहरदेवेहिं गंथियं सव्वं।
पणमामि भत्तिजुत्तो, सुदणाणमहोवयं सिरसा॥
अक्षरमात्रपदस्वरहीनं, व्यञ्जनसन्धिविवर्जितरेफम्।
साधुभिरत्रमम्क्षमित्व्यं, को न विमुह्यति शास्त्रसमुद्रे।
दशाऽध्याये परिच्छिन्ने, तत्त्वार्थे पठिते सति।
फलं स्यादुपवासस्य, भाषितं मुनिपुङ्गवैः॥
तत्त्वार्थसूत्रकर्त्तारं, गृद्धपिच्छोपलक्षितम्।
वन्दे गणीन्द्रसंजातमुमास्वामिमुनीश्वरम्॥
जं सक्कई तं कीरइ, जं च ण सक्कई तहेव सद्दहणं।
सद्दहमाणो जीवो, पावइ अजरामरं ठाणं॥
तवयरणं वयधरणं संजमसरणं च जीवदयाकरणम्।
अंते समाहिमरणं चउविह दुक्खं णिवारेई॥
॥ इति तत्त्वार्थसूत्रापरनामतत्त्वार्थाधिगमे मोक्षशास्त्रं समाप्तम् ॥
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