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तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

तत्त्वार्थ सूत्र (मोक्षशास्त्र - संस्कृत सूत्र एवं हिन्दी व्याख्या)

Tattvartha Sutra / Mokshashastra with Hindi Commentary

आचार्य उमास्वामी (उमास्वाति) / आचार्य पूज्यपाद द्वारा

DevanagariHindipublished177 पृष्ठ

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पृष्ठ 130

अध्याय - ८
कषायवेदनीय - ये चार भेदरूप मोहनीय कर्म के हैं और
इसके अनुक्रम से [ त्रिद्विनवषोडशभेदाः ] तीन, दो, नव और
सोलह भेद हैं। वे इस प्रकार से हैं -
[ सम्यक्त्वमिथ्यात्वतदुभयानि ] सम्यक्त्व मोहनीय, मिथ्यात्व
मोहनीय और सम्यग्मिथ्यात्वमोहनीय - ये दर्शन मोहनीय के
तीन भेद हैं; [ अकषायकषायौ ] अकषायवेदनीय और
कषायवेदनीय ये दो भेद चारित्र मोहनीय के हैं;
[ हास्यरत्यरतिशोकभयजुगुप्सास्त्रीपुन्नपुंसकवेदाः ] हास्य,
रति, अरति, शोक, भय, जुगुप्सा, स्त्रीवेद, पुरुषवेद और
नपुंसकवेद - ये अकषायवेदनीय के नव हैं; और
[ अनन्तानुबन्ध्यप्रत्याख्यानप्रत्याख्यानसंज्वलनविकल्पाः च ]
अनन्तानुबन्धी, अप्रत्याख्यान, प्रत्याख्यान तथा संज्वलन के भेद
से तथा [ एकशः क्रोधमानमायालोभाः ] इन प्रत्येक के
क्रोध, मान, माया और लोभ ये चार प्रकार - ये सोलह भेद
कषायवेदनीय के हैं। इस तरह मोहनीय कर्म के कुल अट्ठाईस
भेद हैं।
The deluding karmas are of twenty-eight kinds.
These are the three subtypes of faith-deluding
karmas¹, the two types of conduct-deluding karmas
¹ The three subtypes of faith-deluding karmas are wrong belief,
mixed right and wrong belief, and right belief slightly clouded by
wrong belief.
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