तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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भइया देते आ रहे हैं। किन्तु अब आय बढ़ी है और खर्च
घटा है इसलिये पहले जितना रुपया नहीं देना पड़ता।
जिस समय मैं दो सौ रुपया खर्च किया करता था, उस
समय कुछ मित्र कहते थे कि पांच सात बालकोंकेलिये
मैं व्यर्थ ही खर्च करता हूं। किन्तु उन्हें नहीं मालूम कि
मनकी तरंगसे ही मैं यह काम नहीं कर रहा हूं, बल्कि
प्रायः १२।१४ वर्षसे जो आग मुझे जला रही है, उसीके
शमनकेलिये मैंने इस काममें हाथ दिया है। मैं कांग्रेसको
छोड़ सकता हूं किन्तु सेवाश्रमका काम छोड़ना मेरे
लिये असम्भव है। दरिद्रनारायणकी सेवाका ऐसा प्रकृ-
ष्ट अवसर कैसे छोड़ा जा सकता है ? सेवाश्रमके पीछे
कितना इतिहास छिपा हुआ है, सेवाश्रमकी कल्पना क्यों
और कैसे मेरे दिमागमें आयी, कैसे मैं विचारमय जगत्-
से कर्ममय जगत्में आया, ये सब बातें किसी और समय
लिखूंगा। पत्रमें लिखनेकी चेष्टा करूंगा तो पत्र किताब
बन जायगा।
बहुत बातें लिखीं, अब बन्द करूं । मेरी बात पूछी है
क्या उत्तर दूं । रवि बाबूकी एक कविता मुझे बहुत
पसन्द हैं। कविकी भाषामें उत्तर देना क्या धृष्टता
होगी ? कवियोंका आदर इसीलिये अधिक है वे, हमारे
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