तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंदलादलि और बङ्गालका भविष्य
पक्ष कहते हैं; देशोद्धार होगा तो हमारे ही द्वारा होगा ,
नहीं तो नहीं होगा । इन अधिकार-लोभी राजनितिज्ञोंके
झगड़ोंसे अलग रहकर चुपचाप आत्मोत्सर्ग करता रहे,
ऐसा स्वदेशसेवी बंगालमें आज नहीं है क्या ? अपनी
intellectual और spiritual उन्नतिकी अवहेलना कर
जिन्होंने देशसेवामें आत्मनियोग किया है, वे भी यदि
क्षुद्रातिक्षुद्र बातोंमें सबको झगड़ते देखकर निराश होकर
राजनीति क्षेत्रसे अलग हो जायं, इसमें आश्चर्य क्या है ?
अपने मानसिक और पारमार्थिक कल्याणको तुच्छ मान
जिन्होंने देशहितका व्रत लिया है, वे क्या इन क्षुद्र
झगड़े झंझटोंमें अपनेको डुबा देंगे ? जन-सेवासे निराश
होकर यदि वे फिर पारमार्थिक कल्याणमें मन लगावें तो
क्या उनको दोष दिया जा सकता है ? आज मैं स्पष्ट
समझ रहा हूं कि समाजकी यही हालत रही तो न जाने
कितने समाजसेवी अनिलवरणका पथ अवलम्बन करेंगे ।
आज बंगालके अनेक कार्यकर्त्ताओंमें व्यवसायी और
पटवारी बुद्धि जाग पड़ी है। वे अब कहने लगे हैं, हमें
क्षमता दो, पद दो, अथवा हमे कार्यकारिणीका सदस्य
बनाओ, नहीं तो हम काम नहीं करेंगे। मैं पूछना चाहता
हूं नरनारायणकी सेवा व्यवसाय बुद्धिसे, contract से
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