तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
बंगालमें दलादलि और झगड़ा झंझट ही अधिक है और
जहांपर जितना कम काम है,वहां उतना ही अधिक झगड़ा
है। भवानीपुरमें कुछ काम होता है इसी लिये झगड़ा
कुछ कम है, किन्तु जो कुछ भी है निष्पक्ष आदमी उससे
म्रियमाण हुए बिना नहीं रह सकता। मैं सिर्फ यही
सोचता हूं कि झगड़ा करनेकेलिये इतने आदमी मिल
मिल जाते हैं, पर मीमांसा करदेने वाला एक भी आदमी
बंगालमें नहीं है ? इसी दलादलिके कारण बंगालने
आज अनिलवरण जैसे स्वदेश सेवकको खो दिया। और
कितने सेवकोंको नहीं खो देगा, कौन जानता है ? बंगाली
आज अन्धे हो रहे हैं, कलह विवादमें निमग्न हैं, इसीलिये
यह बात समझकर भी नहीं समझ पाते । निस्वार्थ आत्म-
दानकी बात तो अब सुनाई नहीं पड़ती । एक महाप्राण
शून्यमें मिल गया, अग्निमय प्रकाशसे युक्त त्यागकी मूर्ति
धारण कर वह हमारे सामने आया,उसी दिव्यालोकके प्रभा-
वसे बंगालीने क्षणभरकेलिये स्वर्गका परिचय पाया;किंतु
फिर वह आलोक भी लुप्त हो गया और बंगाली भी
स्वार्थकी तलैयामे फंस गये। आज बंगालभरमें अधि-
कारके लिये कशमकश हो रही है। जिसके पास अधि-
कार है वह उसे बचाये रखनेकेलिये प्रयत्नशील है। दोनों
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