तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजेल और कैदी
खुल गयीं। मैं अब सोचता हूं साधारणतया उनके प्रति अ-
विचार किया जाता है। उस बार यानी १६२२ में मैं जब
जेलमें था, उस समय एक कैदी मेरे yard में नौकरका
काम करता था। उस समय मैं महाप्राण देशबन्धुके साथ
एक ही स्थानपर रहता था। देशबन्धुके प्राण बड़े सदय
थे, इसीलिये वे सहजभावसे ही कैदीके प्रति आकृष्ट हो
गये थे। वह पुराना पापी था, आठवार सजा भोग चुका
था। किन्तु न जाने कैसे वह भी देशबन्धुके प्रति अनुरक्त
हो उठा था तथा आश्चर्यदायक शक्तिका परिचय दिया
था। छूटनेके समय देशबन्धुने उससे कहा था कि जेलसे
छूटनेपर मेरे साथ बराबर मिला करना, पुराने साथियों-
के साथ अब मत मिलना। कैदी राजी हो गया था और
कहनेके अनुसार काम भी किया था। तुम्हें सुनकर
आश्चर्य होगा कि वह व्यक्ति एक दिन पुराना दागी था,
जेलसे आनेपर वह उनके घर रहा था, तथा बीच-बीचमें
अभद्र व्यवहार करनेपर भी अब सरल भावसे ही जीवन
यापन करता है तथा देशबन्धुके न रहनेसे जिनकी अपार
क्षति हुई है उनमेंसे वह भी एक है। अनेक कहते हैं कि
छोटी और तुच्छ घटनासे ही मनुष्यके महत्वका विचार
करना चाहिये। यह बात सत्य हो तो देशका उन्होंने जो
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