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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 83, कुल 174 में से

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पृष्ठ 83

तरुणके स्वप्न
trial Civilisation" नामक पुस्तक बहरमपुर जेलमें कई
कैदियोंके पास है। मैं जब स्थानान्तरित किया गया तब
अनेक इस किताबको अपने पास रखना चाहते थे। इसकी
तुम्हें जरूरत न होगी यह समझकर वहीं छोड़ आया था।
रसलकी किताबोंका इतना आदर है कि कोई पाकर देना
नहीं चाहता। बहरमपुरके सुपरिण्टेण्डेण्टको लिखा है कि
वे तुम्हारे पास किताब भेज दें। तुम भी उन्हें एक पत्र
लिख देना, तकादा हो जायगा। तुम्हारा काम अटक गया
इसके लिये बड़ा दुःखी हूं किन्तु तुम समझ सकते हो
कि मैं उस समय नहीं समझ सका था कि तुम्हें इसकी
इतनी सख्त जरूरत पड़ेगी। "Free Thought and
Official Propaganda" मेरे पास नहीं है, यह किताब
तुमने मेरे पास नहीं भेजी।
किताब चुनदेनेकेलिये अनेक धन्यवाद। हम लोग
सब आशा करते हैं कि जो काम तुमने शुरू किया है, वह
भगवानकी कृपासे अच्छी तरह चलेगा। तुम्हारे लेख मैं
सम्मान सहित पढूंगा, यह कहना न होगा। किताब प्रका-
शित करते समय कवरकी तरफ ध्यान रखना, बंगवाणीमें
रवीन्द्रनाथपर लिखा हुआ एक लेख देखो, मैंने अभी उसे
पढ़ा नहीं है किन्तु विषय चित्ताकर्षक मालूम पड़ता है।
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