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तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 82, कुल 174 में से

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पृष्ठ 82

जेल और कैदी
उन्नततर कर्म और उच्चतर सफलताको प्रेरणा ला देगी।
तुम क्या समझते हो कि बिना दुख कष्टके जो मिलता है,
उसका कुछ मूल्य है ?
कुछ दिन पहले तुमने जो किताबें भेजी थीं वे सब
मिल गयीं। किन्तु अब उन्हें वापिस नहीं कर सकता,
क्योंकि उनके पढ़नेवाले बहुत हो गये हैं। तुम्हारी रुचि
जितनी अच्छी है, उस हालतमें यह कहना अनावश्यक है
कि तुम जो किताबें भेजोगे वे सादर गृहीत होंगी। इति—
1320/05 माण्डला जेल
२५-६-२५
प्रिय दिलीप,
अन्तिम चिट्ठीके बाद तुम्हारी कुल तीन चिट्ठियां
मिलीं। चिट्ठियोंकी तारीखें हैं, ६ मई, १५ मई, १५ जून।
तुम्हारा भेजा हुआ किताबोंका पार्सल मिल गया।
तुर्गनेवकी Smoke नामक किताब नहीं मिली। पार्सल
आफिसमें खोला गया था, इसलिये सुपरिण्टेण्डेण्टसे इस
विषयमें कह रखा है। जरूरत होनेपर कलकत्तेकी C. I.
D. से वे पूछेंगे, तुम भी D. I. G. C. I. D. को लिख
कर ध्यानाकर्षण कर सकते हो।
Bertrand Russel की "Prospects of Indus
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