तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
आघात यथा संभव कम हो आता है वहां बन्दी जीवन
उतना यंत्रणा दायक नहीं होता । किन्तु इस तरहका सूक्ष्म
आघात ऊपरवालोंकी तरफसे होता है, जेलके अधिकारि-
योंका इसमें कुछ हाथ नहीं रहता । ये जो आघात और
उत्पीड़न हैं वे मनुष्यके मन को, आघात करनेवालेके प्रति और
भी विकृत कर देते हैं और इसीसे मनमें होता है कि ये
आघात व्यर्थ हैं । इनसे हम अपना पार्थिव अस्तित्व
भूल जाते हैं और अपने हृदयमें आनन्दधामकी प्रतिष्ठा
करते हैं। इसी लिये ये आघात हमारी स्वप्नाविष्ट
आत्माको जगाकर हमें बल देते हैं, कहते हैं कि हमारे
आस-पासकी अवस्था कितनी कठोर और निर्मम है।
तुमने कहा, रोज रोज मनुष्यके आंसू पृथ्वीकी
नीचीसे नीची तहोंको भिगाते चले जा रहे हैं,—यह
दृश्य तुम्हें प्रतिदिन गम्भीर और विषण्ण बना रहा
है। किन्तु ये आंसू, दुखके ही आंसू नहीं हैं, उनमें
करुणाश्रु और प्रेमाश्रु भी हैं। समृद्धतर और प्रशस्ततर
आनन्द स्रोतपर पहुंचनेकी संभावना होनेपर आपत्तियोंके
छोटे मोटे गढ़ोंको पार करनेसे क्या तुम इन्कार कर देते ?
मैं खुद तो दुखवाद और निराशाका कोई कारण नहीं
देखता, बल्कि मनमें यही होता है कि दुख और यंत्रणा
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