तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजेल और कैदी
साधारण और कैदियों राजनैतिक कैदियोंके भाग्यके फर्कको
साफ कर देता है। जो राजनैतिक कैदी है, वह जानता है
कि छुटकारा पानेपर समाज उसका सहर्ष स्वागत करेगा,
किन्तु साधारणतः अपराधी इस तरहकी संभावना नहीं
देखता। संभव है वह अपने घरके सिवा और कही भी सहा-
नुभूतिकी आशा नहीं कर सकता, इसी लिये सर्वसाधारण
को मुंह दिखानेमे उसे शर्म मालूम होती है। मेरे Yard
मे जो कैदी काम करते है उनमे कुछ कैदी कहते है कि उनके
घरवालोको मालूम ही नही कि जेलमें है। वे शर्मके मारे
घरपर किसी तरहका संवाद नही भेजते। यह परिस्थिति
बड़ी असन्तोषजनक मालूम होती है। सभ्य समाज
अपराधियोंके प्रति अधिक सहानुभूतिशील क्यों न
बने ?
जेल जीवनकी अभिज्ञता और उससे उठनेवाले विचा-
रोंसे पन्नेपर पन्ने लिख सकता हूं। पर एक चिट्ठीका
भी तो कहीं अन्त होना चाहिये। विशेष शक्ति और
उद्यम होता तो इस विषयपर एक पुस्तक लिखनेकी चेष्टा
करता किन्तु ऐसी सामर्थ्य नही है।
मैं जेलके कष्टको शारीरिक न मानकर मानसिक
माननेका पक्षपाती हूं। जहां अत्याचार और अपमानका
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