तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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किन्तु कुछकी पूर्ति बाहरसेही हो सकती है। इन सब
बाहिरी चीजोंसे वंचित रहना अकाल वार्द्धक्यका मामूली
कारण नहीं है। अलीपुर जेलमें युरोपियन कैदियोंके
लिये सप्ताहमें एक दिन संगीतका प्रबन्ध है, पर हमारे
लिये नहीं। पिकनिक, संगीत चर्चा, साधारण वक्तृता
और खुली जगहमें घूमना तथा काव्य साहित्यकी चर्चा
करना हमारे जीवनको कितना सरस और मधुर बना
देता है यह हम साधारण जीवनमें अनुभव नहीं कर सकते
परन्तु जब हमें जबरन बन्दी बनाकर रखा जाता है,
तब समझमें आता है। जबतक जेलमें स्वास्थ्यकर और
सामाजिक विधि व्यवस्थाका प्रबन्ध न होगा, उस समय
तक कैदियोंके सुधारकी बात असंभव है। और तबतक
जेल नैतिक उन्नतिका साधन न होकर वर्तमान अवनत
अवस्थामें ही पड़ी रहेगी।
यह लिखना शायद उचित नहीं है कि अपने आदमियों,
मित्रों प्रिय जनों और सर्वसाधारणकी सहानुभूतिसे मनु-
ष्यको जेलमें भी अत्यन्त सुख होता है। यह भाव कैदीके
मनमें सूक्ष्म रूपसे काम करता है, तब भी मैं अपने मनका
विश्लेषण करके समझ पाता हूं कि यह भाव कुछ कम
वास्तविक नहीं है। यह सहानुभूति प्राप्त करनेका भाव
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