तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
मेरा विचार है कि जेलमें रहनेवाले अधिकांश अप-
राधियोंकी जेलमें नैतिक उन्नति नहीं होती बल्कि वे
और भी हीन हो जाते हैं। यह मुझे मानना होगा कि
इतने दिन तक जेलमें रहनेके कारण जेलोंमें आमूल सुधार
होना चाहिये,यह मैं अनुभव करने लगा हूं और भविष्यमें
जेलोंका सुधार भी मेरे कार्यक्रमका एक अंग होगा।
भारतीय जेल-शासन-प्रणाली एक खराब प्रणाली (यानी
ब्रिटिश प्रणाली) का अनुकरण मात्र है। जिस प्रकार
कलकत्ता विश्वविद्यालय एक खराब यानी लण्डन विश्व-
विद्यालयका अनुकरण है। जेल संस्कारकेलिये हमें
अमेरिकाके जेल खानोंकी व्यवस्थाका अनुसरण करना
चाहिये।
इस परिवर्तनमें सबसे आवश्यक है एक नवीन मनो
भाव, कैदियोंके प्रति सहानुभूतिका भाव होना, अपरा-
धियोंकी अपराध प्रवृत्तिको मानसिक व्याधि ही मानना
होगा। और इसके दूर होनेका उपाय हो ऐसी व्यवस्था ही
करना होगा। प्रतिषोध मूलक दण्ड विधिको संस्कार-
मूलक दण्ड विधिकेलिये रास्ता छोड़ देना होगा।
मैं नहीं समझता कि यदि मैं स्वयं कैदी न होता
तो एक कैदीको सहानुभूतिकी नज़रसे देख सकता और
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