तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजेल और कैदी
स्पर्श करती है, चिन्ता और अनुभूतिको अनुप्राणित करती
है कि मेरे लिये उसका उत्तर देना सुकठिन है। इस चिट्ठी-
को “censor” हाथोंसे गुजर कर जाना होगा यह भी
एक असुविधा है। क्योंकि यह कोई नहीं चाहता कि
उसके हृदयके गम्भीर भाव दिनके प्रकाशमें नग्न पड़े रहे।
इसीलिये पत्थरकी दीवाल और लोहेके फाटकमें बन्द
इस समय जो कुछ सोचता हूं, अनुभव करता हूं उसका
अनेकांश उपयुक्त समय न आनेतक अकथित ही रखना
पड़ेगा।
हममेंसे अनेक बिना कारण और अज्ञात कारण
जेलोंमे बन्द है, यह भावना तुम्हारी मार्जित रुचिको
आघात करती है यह सम्पूर्ण स्वाभाविक है। किन्तु जब
सब घटनाएं मनमें ही, भीतर ही भीतर हो रही हैं, तब
इसे अध्यात्मिक दृष्टिसे भी देखा जा सकता है। मैं यह
बात नहीं कह सकता कि जेलमे रहना ही मैं पसन्द
करता हूं, क्योंकि यह कहना बिलकुल ढोंग होगा। बल्कि
मैं यह तब कह सकता हूं कि कोई भी सभ्य शिक्षित
आदमी जेलोंमें रहना पसन्द नहीं कर सकता। जेलकी
आवहवा मनुष्यको विकृत और अमानुष करनेके लिये हैं,
और मेरा विश्वास है यह बात हर एक जेलके लिये कही
जा सकती है।
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