तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)
Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose
नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंतरुणके स्वप्न
आदर्शको वास्तव द्वारों प्रस्फुटित न कर सकूँ तो भी
जीवन व्यर्थ न होगा। महान आदर्शको यदि प्राणोंमें रखे
रहूँ, आदर्शके साथ अपना जीवन मिला दूँ तो मैं सन्तुष्ट
हूँ। मेरा जीवन दुनियाकी नजरोंमें व्यर्थ होनेपर भी, मेरी
नजरोंमें (मालूम होता है भगवानकी दृष्टिमें भी) व्यर्थ
न होगा। दुनियामें सभी चीज क्षणभंगुर हैं, सिर्फ एक
चीज अविनाशी है, नष्ट नहीं होती, वह है भाव या
आवेग। हमारा आदर्श, हमारी आशा, आकांक्षा, चिन्ता-
धारा अविनाशवर है। आपको क्या दिवालोंसे घेरकर
कोई रख सकता है ?
पूर्ण रूपसे उत्सर्ग करनेके लिये दूसरी तरफ आदर्श-
को पूर्ण रूपसे ग्रहण करना होगा। यानी आदर्शकी पूर्ण
प्राप्तिके लिये अपना पूर्णोत्सर्ग चाहिये। त्याग और उप-
लब्धि,—renunciation and realisation एक ही
चीजके दो पहलू हैं। इस समय आदर्शको सम्पूर्णतः
उत्सर्ग करनेके लिये मेरे प्राण व्याकुल हो उठे हैं।
जिन्होंने इतनी दुर्बलताके बीचमे मुझे शक्तिके उच्च