सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

तरुण के स्वप्न (नेताजी सुभाष चन्द्र बोस - युवा भारत के नाम क्रान्तिकारी वैचारिक घोषणा-पत्र)

Tarun Ke Swapna by Netaji Subhash Chandra Bose

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस द्वारा

DevanagariHindipublished174 पृष्ठ

पृष्ठ 69, कुल 174 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 69

तरुणके स्वप्न
〰〰〰〰〰〰〰
("आत्म शक्ति" सम्पादक श्रीगोपाल लालको लिखे
हुए पत्रका अंश)
इनसिन जेल
५ अप्रैल, १६२७
परम प्रीति भाजनेषु,
आपका ५ वीं चैत्रका पत्र पाकर आनन्दित हुआ,
आपने अनेक प्रश्न किये हैं क्या उत्तर दूं, मालूम नहीं।
बहुत बातें लिखनेकी इच्छा होती है, पर लिखी जा सकती
है क्या ?
शरीरके सम्बन्धमें कोई नयी बात नहीं कहना है,
"यथा पूर्वम् तथा परम्" परिणाम क्या होगा मालूम नहीं;
अब शरीरकी चिन्ता नहीं करता। पिछले महिनोंमें मेरे
मनकी गति कुछ भिन्न धाराओंकी तरफ द्रुत वेगसे गयी
है। मेरी यह धारणाबद्ध मूल होती जा रही है कि जीवन-
को सोलहों आना देनेके लिये तैयार न होने पर मेरुदण्ड-
को सीधा रखना मुश्किल है। जीवन प्रभातमें यही
प्रार्थना हृदयमें रखकर अवतीर्ण हुआ था,—"तोमार
पोताका जारे दाओ तारे बोहिबार दाओ शक्ति।" भविष्य-
की बात तो नहीं कह सकता पर अभीतक वह शक्ति भग-
बान देते आ रहे हैं। इसीलिये मैं बहुत सुखी हूं, बीच-
६८